अब क्या होने वाला है गोल्ड की कीमतों में, बढ़ेगी या गिरेंगी ?
गोल्ड में तेजी की उम्मीदें और मजबूत हो गई हैं. ग्लोबल ब्रोकरेज UBS ने अपने अनुमान को अपडेट करते हुए मार्च 2026 तक सोने का टारगेट $100 बढ़ाकर $3,600 प्रति औंस कर दिया है. UBS के मुताबिक, सोने की कीमतों को आगे सपोर्ट मिलेगा. रिपोर्ट में कई कारण भी बताए गए है. अमेरिका की मैक्रो इकॉनॉमिक रिस्क्स – लगातार अनिश्चितता और ग्रोथ के दबाव से गोल्ड सुरक्षित निवेश (safe haven) बना रहेगा.De-dollarization ट्रेंड – कई देश डॉलर पर निर्भरता घटाकर रिजर्व में गोल्ड की हिस्सेदारी बढ़ा रहे हैं.
निवेशकों की मजबूत डिमांड – ETFs और सेंट्रल बैंक्स की बड़ी खरीदारी सोने की कीमत को ऊपर ले जाएगी.
मौजूदा स्थिति-पिछले कुछ महीनों में गोल्ड ने रिकॉर्ड हाई बनाए हैं.दुनिया भर के सेंट्रल बैंक, खासकर एशिया और मिडल ईस्ट के, लगातार गोल्ड रिज़र्व बढ़ा रहे हैं.कमजोर डॉलर और ब्याज दरों में कटौती की संभावना भी सोने के लिए पॉजिटिव फैक्टर है.
UBS का मानना है कि इन परिस्थितियों में गोल्ड में लॉन्ग-टर्म निवेशक बने रह सकते हैं. मार्च 2026 तक कीमतें $3,600/oz तक पहुंच सकती हैं, यानी मौजूदा स्तरों से अच्छी खासी तेजी की गुंजाइश है.
भारत पर असर
1. गोल्ड इंपोर्ट बिल बढ़ेगा-भारत अपनी ज़रूरत का ज़्यादातर सोना इंपोर्ट करता है.अगर गोल्ड $3,600/oz तक गया तो भारत का ट्रेड डेफिसिट और करंट अकाउंट डेफिसिट (CAD) बढ़ सकता है.
रुपये पर दबाव आने की संभावना है.

2. महंगाई पर असर-सोने की ऊंची कीमतें ज्वेलरी महंगी करेंगी.फेस्टिव सीजन और शादियों में मांग तो रहेगी, लेकिन खपत (consumption) थोड़ी प्रभावित हो सकती है.
3. निवेशकों को फायदा-भारतीय निवेशकों के लिए गोल्ड ETF, गोल्ड फंड्स और सोवरेन गोल्ड बॉन्ड (SGBs) शानदार रिटर्न दे सकते हैं.SGB में ब्याज + गोल्ड प्राइस गेन डबल फायदा देगा.
4. सेंट्रल बैंक (RBI) पर असर-RBI पहले से ही अपने फॉरेन रिजर्व में गोल्ड की हिस्सेदारी बढ़ा रहा है.कीमतें बढ़ीं तो RBI के रिजर्व का वैल्यूएशन बेहतर होगा.
5. ज्वेलरी और रियल डिमांड-ज्वेलरी सेक्टर को दबाव झेलना पड़ेगा क्योंकि ऊंचे दाम पर ग्राहक कम खरीदारी कर सकते हैं.हालांकि, भारतीय परिवारों की “गोल्ड को सुरक्षित संपत्ति मानने की आदत” लंबे समय में डिमांड को पूरी तरह कम नहीं होने देगी.










