नेपाल की सड़कों पर सेना की गश्त; इंडिगो की काठमांडू के लिए उड़ान सेवाएं रद्द !
नेपाल के युवाओं के आक्रोश ने देश में राजनीतिक-सामाजिक उथल-पुथल पैदा कर दी है। आक्रोशित जेन-जी (युवाओं) की भीड़ ने राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री और मंत्रियों के घरों को आग लगा दी। इसके अलावा देश की संसद, सुप्रीम कोर्ट और कई सरकारी इमारतों में भी आगजनी की गई। भारत ने बिगड़ते हालात पर चिंता जाहिर की है। एतहतियात के तौर पर एअर इंडिया, इंडिगो और नेपाल एयरलाइंस ने दिल्ली से काठमांडो जाने वाली उड़ानों को रद्द कर दिया है।
नेपाल में हिंसा के चलते फंसे भारतीय लोग
नेपाल में हिंसा के चलते उड़ान सेवाएं बाधित होने से सैंकड़ों भारतीय वहां फंसे हुए हैं। मुंबई के एक भारतीय नागरिक मयूर पाटिल ने कहा, ‘हम भगवान पशुपतिनाथ के दर्शन और नेपाल के दर्शनीय स्थलों की यात्रा के लिए आए थे। हम 8 सितंबर को यहां पहुंचे। हमने पशुपतिनाथ मंदिर में दर्शन किए, लेकिन अब हम विरोध प्रदर्शनों के कारण फंस गए हैं। हमने भारतीय दूतावास को फोन किया और उन्होंने हमें जहां भी हैं, वहीं सुरक्षित रहने को कहा। वे हमें आगे क्या करना है, इसके बारे में बताएंगे। हमने 8 दिनों के दौरे की योजना बनाई थी। हमारा 15 लोगों का एक समूह हैं।’
काठमांडू की सड़कों पर नेपाली सेना
नेपाल की राजधानी काठमांडू में नेपाली सेना गश्त कर रही है, जहां पिछले दो दिनों से हिंसा जारी है और विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया था। कथित भ्रष्टाचार को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों के बीच नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कल इस्तीफा दे दिया। भैरवा में अगले आदेश तक कर्फ्यू लागू कर दिया गया है।
मीडिया समूह की इमारत में लगाई आग
नेपाली मीडिया कांतिपुर मीडिया समूह के मुख्यालय में भी मंगलवार को आग लगा दी गई है। इमारत से अभी भी धुआं उठ रहा है। कथित भ्रष्टाचार को लेकर सरकार के खिलाफ प्रदर्शनों के बीच नेपाली प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने कल इस्तीफा दे दिया।
इंडिगो ने काठमांडू के लिए उड़ान सेवाएं रद्द की
नेपाल में हालात को देखते हुए इंडिगो एयरलाइंस ने काठमांडू जाने वाली उड़ानें अगले आदेश तक रद्द कर दी हैं। इंडिगो ने एडवाइजरी जारी कर बताया कि काठमांडू से आने और जाने वाली सभी उड़ानें 10 सितंबर को दोपहर 12 बजे तक रद्द रहेंगी। एयरलाइंस ने काठमांडू एयरपोर्ट के बंद होने को इसकी वजह बताया है।
चितवन जिले में जिला प्रशासन कार्यालय में लगाई आग
पुलिस ने बताया कि चितवन जिले में प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को जिला प्रशासन कार्यालय और उससे सटे चुनाव कार्यालय में आग लगा दी। जिला न्यायालय, भू-राजस्व और सरकारी वकीलों के कार्यालयों में भी आग लगा दी गई, जिससे दस्तावेज नष्ट हो गए। भरतपुर और अन्य इलाकों में नगरपालिका और वार्ड कार्यालयों पर भी हमला किया गया। नेपाली कांग्रेस, यूएमएल और माओवादी केंद्र पार्टियों के स्थानीय कार्यालयों में आग लगा दी गई। भरतपुर के भटभटेनी सुपरमार्केट में मंगलवार शाम लगी आग बुधवार सुबह भी काबू से बाहर थी।
पूर्व उप प्रधानमंत्री लामिछाने को छुड़ाया
नक्खू जेल में भ्रष्टाचार के आरोप में बंद राष्ट्रीय प्रजातंत्र पार्टी के अध्यक्ष और पूर्व उप प्रधानमंत्री रबि लामिछाने को प्रदर्शनकारियों ने जेल से छुड़ा लिया। उन्हें बीते साल 18 अक्तूबर को गिरफ्तार किया गया था। छात्रों के आंदोलन के बाद जेल प्रशासन ने लामिछाने की सुरक्षा सुनिश्चित करने से मना कर दिया। इसके बाद, उनकी पत्नी निकिता पौडेल ने व्यक्तिगत तौर पर सुरक्षा की जिम्मेदारी लेते हुए उन्हें जेल से बाहर निकाला। लामिछाने की रिहाई के बाद नक्खू जेल से सभी कैदी बाहर निकल गए। इस जेल में लगभग 1,500 कैदी बंद थे। बदले हालात में लामिछाने भी प्रधानमंत्री पद के दावेदार माने जा रहे हैं।
पार्टियों के दफ्तर-जेल पर हमला, कैदी भागे
आंदोलनकारियों ने नेताओं के घरों के साथ ही नेपाली कांग्रेस, सीपीएन-यूएमएल समेत कई राजनीतिक दलों के दफ्तरों में भी आग लगा दी। सुरक्षाकर्मियों ने नेताओं व उनके परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर ले जाने की कोशिश की। धनगढ़ी में प्रदर्शनकारियों ने जेल का फाटक तोड़ दिया, जिसके बाद सैकड़ों कैदी जेल से फरार हो गए। काठमांडो में जगह-जगह सड़कों पर टायर जलाकर रास्ता रोका गया।
2015 से सक्रिय है हामी नेपाल संगठन
हामी नेपाल नामक संगठन वैसे तो 2015 से सक्रिय है लेकिन इसे 2020 में पंजीकृत कराया गया था। जानकारी के मुताबिक, इसका असल मुखिया संदर्क रूइट नामक एक सर्जन है। उसे हामी नेपाल ने अपना मेंटर बताया है। एनजीओ के 1600 से ज्यादा सदस्य हैं। हामी नेपाल ने प्रदर्शनकारियों की भीड़ जुटाने के लिए इंस्टाग्राम और डिस्कोर्ड एप का इस्तेमाल किया जिसमें ग्रुप चैट में लगातार निर्देश दिए जा रहे थे।
सुदन गुरुंग बने आंदोलन का चेहरा
नेपाल में आंदोलन भड़कने के बीच एक ही नाम सबसे ज्यादा सुर्खियों में आ रहा है, वो है 36 वर्षीय सुदन गुरुंग का। गुरुंग को ही जेन-जी के इस आंदोलन का चेहरा माना जा रहा है। वह हामी नेपाल नामक एक एनजीओ के कर्ताधर्ता हैं। उनका संगठन नेपाल में प्राकृतिक आपदाओं में मदद करने का दावा करता है। यह संगठन युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय है, यही वजह है कि उनकी एक आवाज पर हजारों युवा सड़कों पर उतर आए।










