बोनस का लालच या फर्जीवाड़ा? रेलवे बोर्ड के नाम से वायरल पत्र ने मचाई हलचल 78 दिन के वेतन के बराबर बोनस और 41,149 रुपये भुगतान की कथित मंजूरी निकली फर्जी

 

 

नई दिल्ली। वित्तीय वर्ष 2025-26 के लिए रेलवे कर्मचारियों को उत्पादकता संबद्ध बोनस मिलने की उम्मीद के बीच रेलवे बोर्ड के नाम से प्रसारित एक कथित पत्र ने कर्मचारियों के बीच हलचल मचा दी। सामाजिक माध्यमों और विभिन्न संदेश माध्यमों पर तेजी से प्रसारित इस पत्र में 78 दिन के वेतन के बराबर बोनस तथा 41,149 रुपये भुगतान की कथित मंजूरी का उल्लेख किया गया था। रेलवे बोर्ड ने अब इस पत्र को फर्जी और मनगढ़ंत करार दिया है।

रेलवे बोर्ड की ओर से 7 अक्टूबर 2026 को जारी स्पष्टीकरण में बताया गया कि आरबीई संख्या 101/2026, दिनांक 6 अक्टूबर 2026 के नाम से प्रसारित पत्र रेलवे बोर्ड द्वारा जारी नहीं किया गया है। पत्र पर संबंधित अधिकारी के नाम से किए गए हस्ताक्षर को भी फर्जी बताया गया है। बोर्ड ने स्पष्ट किया कि पत्र में दी गई सामग्री पूरी तरह अनधिकृत है।

किसने बनाया बोनस का यह ‘आदेश’?

वायरल पत्र में बोनस की अवधि और भुगतान की राशि तक का उल्लेख होने से कर्मचारियों के बीच चर्चा तेज हो गई। सवाल उठता है कि रेलवे बोर्ड के नाम और कथित हस्ताक्षर का इस्तेमाल कर यह पत्र किसने तैयार किया और इसे सामाजिक माध्यमों पर किसने प्रसारित किया?

बोर्ड बोला—एक रुपया भी भुगतान नहीं

रेलवे बोर्ड ने सभी क्षेत्रीय रेलवे, उत्पादन इकाइयों और संबंधित कार्यालयों को निर्देश दिए हैं कि इस फर्जी पत्र को पूरी तरह नजरअंदाज किया जाए। इसके आधार पर न कोई प्रशासनिक कार्रवाई की जाए और न ही कोई भुगतान किया जाए।

असली आदेश की पुष्टि जरूरी

बोर्ड ने अधिकारियों और कर्मचारियों को सावधान करते हुए कहा है कि उत्पादकता संबद्ध बोनस से संबंधित किसी भी आदेश की वास्तविकता की पुष्टि कार्रवाई से पहले रेल मंत्रालय और रेलवे बोर्ड की आधिकारिक वेबसाइट से की जाए। सामाजिक माध्यमों, संदेश माध्यमों अथवा अन्य अनधिकृत स्रोतों से प्राप्त सूचना के आधार पर कोई कार्रवाई या भुगतान नहीं किया जाएगा।

रेलवे बोर्ड ने इस पूरे मामले की जानकारी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों तक पहुंचाने तथा भविष्य में ऐसे फर्जी पत्रों से सावधान रहने की सलाह दी है।

रिपोर्ट: नवीन यादव
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