आरपीएफ आईजी के निरीक्षण में मीडिया प्रवेश पर सवाल मथुरा-कोसीकलां स्टेशन पर बैरक और निरीक्षण क्षेत्र में मीडिया को रोका गया, कैमरे-मोबाइल बंद रखने को कहा गया
रिपोर्ट: नवीन यादव — VERDICT NEWS
मथुरा/कोसीकलां। आगरा मंडल के मथुरा-कोसीकलां रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ महानिरीक्षक प्रदीप कुमार गुप्ता के वार्षिक निरीक्षण के दौरान मीडिया कवरेज को लेकर सवाल सामने आए हैं। निरीक्षण की जानकारी मिलने पर स्थानीय मीडियाकर्मी स्टेशन पहुंचे, लेकिन उन्हें आरपीएफ बैरक और निरीक्षण वाले हिस्से में प्रवेश की अनुमति नहीं दी गई।
मौके पर मौजूद सुरक्षाकर्मियों ने मीडियाकर्मियों को कैमरे और मोबाइल बंद रखने के लिए भी कहा। सुरक्षा व्यवस्था का हवाला देते हुए मीडिया टीम को निरीक्षण क्षेत्र से बाहर रहने के निर्देश दिए गए।
सवाल यह नहीं कि सुरक्षा क्यों, सवाल यह है कि सीमा कितनी?
सुरक्षा की दृष्टि से किसी संवेदनशील या प्रतिबंधित क्षेत्र में आम लोगों अथवा मीडिया का प्रवेश सीमित किया जाना समझा जा सकता है। लेकिन यहां सवाल यह है कि मीडिया कवरेज को लेकर प्रतिबंध की सीमा क्या थी और कैमरे तथा मोबाइल बंद रखने का निर्देश किस प्रक्रिया के तहत दिया गया?
यदि निरीक्षण नियमित प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा था, तो मीडिया को केवल निरीक्षण क्षेत्र से बाहर रखने तक व्यवस्था सीमित थी या कैमरा और मोबाइल के इस्तेमाल पर भी रोक के पीछे कोई अलग सुरक्षा प्रोटोकॉल था? इस बिंदु पर स्पष्टता जरूरी है।
बैरक तक मीडिया की पहुंच क्यों रोकी गई?
आरपीएफ अधिकारियों के अनुसार निरीक्षण के दौरान सुरक्षा और आंतरिक प्रक्रिया को ध्यान में रखते हुए कुछ क्षेत्रों में प्रवेश सीमित रखा गया था। अधिकारियों ने निरीक्षण को नियमित प्रक्रिया का हिस्सा बताया।
इसके बावजूद सवाल बना हुआ है कि क्या मीडिया को निरीक्षण की गतिविधियों की सामान्य कवरेज के लिए कोई वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई गई थी? यदि नहीं, तो इसकी वजह और लागू नियमों की जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए।
मीडिया कवरेज और सुरक्षा व्यवस्था के बीच संतुलन जरूरी
आरपीएफ आईजी प्रदीप कुमार गुप्ता ने स्टेशन और आरपीएफ बैरक की व्यवस्थाओं का निरीक्षण किया तथा संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों से जानकारी ली।
मीडिया को निरीक्षण क्षेत्र से बाहर रखने का निर्णय सुरक्षा कारणों से लिया गया बताया गया है। ऐसे में मामला किसी निष्कर्ष से अधिक प्रक्रियागत पारदर्शिता का सवाल बनता है।
मुख्य सवाल यही है—यदि प्रवेश सीमित करने का निर्णय सुरक्षा कारणों से था, तो कैमरे और मोबाइल बंद रखने के निर्देश का स्पष्ट आधार क्या था? क्या इस संबंध में आरपीएफ की कोई निर्धारित गाइडलाइन या निरीक्षण संबंधी प्रोटोकॉल लागू था?
इन सवालों पर आरपीएफ की स्पष्ट आधिकारिक जानकारी सामने आने से मीडिया कवरेज को लेकर पैदा हुई स्थिति को बेहतर ढंग से समझा जा सकेगा।










