RPF को आधुनिक तकनीक से लैस करने के लिए 125 करोड़ के उपकरणों की खरीद 22 हजार बॉडी-वॉर्न कैमरे, आधुनिक संचार उपकरण, फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली और ड्रोन निगरानी तकनीक पर जोर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की महानिदेशक सोनाली मिश्रा ने बताया कि बल को तकनीकी रूप से सक्षम और आधुनिक बनाने के लिए करीब 125 करोड़ रुपये के उपकरण खरीदे जा रहे हैं।
रिपोर्ट नवीन यादव
रेलवे सुरक्षा बल (RPF) की महानिदेशक सोनाली मिश्रा ने बताया कि बल को तकनीकी रूप से सक्षम और आधुनिक बनाने के लिए करीब 125 करोड़ रुपये के उपकरण खरीदे जा रहे हैं। इनमें 22 हजार बॉडी-वॉर्न कैमरे, वॉकी-टॉकी सेट, अपराधियों की पहचान के लिए फिंगरप्रिंट प्रणाली और आधुनिक निगरानी तकनीक शामिल हैं।
उन्होंने बताया कि क्रिमिनल प्रोसीजर आइडेंटिफिकेशन (CrPI) प्रणाली और नेशनल ऑटोमेटेड फिंगरप्रिंट आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (NAFIS) के हार्डवेयर पर 16.50 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। वहीं, वॉकी-टॉकी सेट और अन्य आधुनिक संचार उपकरणों की खरीद पर 47.50 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं।
आरपीएफ प्रशिक्षण केंद्रों में 28 करोड़ रुपये की लागत से चेहरे की पहचान प्रणाली (FRS), वीडियो विश्लेषण आधारित सीसीटीवी निगरानी प्रयोगशालाएं और प्रवेश नियंत्रण प्रयोगशालाएं विकसित की जा रही हैं। लखनऊ स्थित जगजीवन राम आरपीएफ अकादमी में ड्रोन प्रशिक्षण और निगरानी के लिए अत्याधुनिक प्रयोगशाला भी बनाई जा रही है।
महानिदेशक ने बताया कि 33 करोड़ रुपये की लागत से 22 हजार बॉडी-वॉर्न कैमरे खरीदे जा रहे हैं। पिछले एक वर्ष में आरपीएफ के ड्रोन बेड़े में करीब 120 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। अब तक दो हजार से अधिक आरपीएफ कर्मियों को ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है।
उन्होंने कहा कि इन तकनीकी संसाधनों से रेलवे परिसरों, यात्री क्षेत्रों और रेल संपत्ति की सुरक्षा मजबूत करने के साथ चोरी, पत्थरबाजी, अनधिकृत प्रवेश तथा अन्य आपराधिक घटनाओं की रोकथाम और पहचान में मदद मिलेगी।










