आरपीएफ की कानूनी लड़ाई लाई रंग, रेलवे फाटक तोड़ना गैर-जमानती
झारखंड हाई कोर्ट ने बदला पूर्व आदेश, दोषी पाए जाने पर पांच साल तक की कैद का प्रावधान
रांची। रेलवे क्रॉसिंग पर बंद फाटक या बैरियर तोड़कर निकलने वालों की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। झारखंड हाई कोर्ट ने रेलवे अधिनियम की धारा 160(2) के तहत दर्ज अपराध को गैर-जमानती माना है। आरपीएफ और केंद्र सरकार की ओर से उठाए गए कानूनी मुद्दे पर सुनवाई के बाद अदालत ने अपने पूर्व आदेश में संशोधन किया। संबंधित धारा के तहत दोषी पाए जाने पर पांच साल तक की कैद का प्रावधान है।
आरपीएफ ने अदालत में उठाया कानूनी मुद्दा
यह मामला आनंद कुमार यादव की अग्रिम जमानत याचिका से जुड़ा है। इससे पहले सात मई को अदालत ने उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज करते हुए संबंधित अपराध को जमानती माना था। इसके बाद रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ) और केंद्र सरकार की ओर से इस कानूनी वर्गीकरण पर आपत्ति जताते हुए पूर्व आदेश में संशोधन की मांग की गई।
आरपीएफ और केंद्र सरकार की ओर से दलील दी गई कि रेलवे अधिनियम की धारा 160(2) के तहत दर्ज अपराध को जमानती मानना सही नहीं है। संबंधित कानूनी प्रावधानों और न्यायिक फैसलों के आधार पर अदालत से इस मुद्दे पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया गया।
आरपीएफ की दलील के बाद आदेश में संशोधन
सुनवाई के दौरान अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले और भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता में अपराधों के वर्गीकरण से जुड़े प्रावधानों पर विचार किया। इसके बाद हाई कोर्ट ने धारा 160(2) के तहत अपराध को गैर-जमानती माना और सात मई के अपने पूर्व आदेश में संशोधन करते हुए मामले का निपटारा कर दिया।
स्कूटी से बैरियर टकराने का दिया था तर्क
मामले में याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई थी कि वह रेलवे फाटक पार करने की कोशिश कर रहा था। इसी दौरान गेटमैन ने अचानक बैरियर गिरा दिया, जिससे वह स्कूटी पर समय से ब्रेक नहीं लगा सका और वाहन रेलवे फाटक के लोहे से टकरा गया। याचिकाकर्ता का दावा था कि घटना में रेलवे फाटक को कोई नुकसान नहीं हुआ।
इसी आधार पर उसने अग्रिम जमानत देने का अनुरोध किया था। हालांकि, आरपीएफ और केंद्र सरकार की ओर से अपराध की प्रकृति तथा संबंधित कानूनी प्रावधानों के आधार पर पूर्व आदेश में बदलाव की मांग की गई।
रेलवे सुरक्षा के लिहाज से अहम आदेश
रेलवे क्रॉसिंग पर बंद फाटक को जबरन पार करना या बैरियर तोड़ना रेल परिचालन और आम लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा बन सकता है। ऐसे मामलों में रेलवे संपत्ति को नुकसान पहुंचाने के साथ-साथ दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।
इस मामले में आरपीएफ की ओर से उठाए गए कानूनी मुद्दे पर हाई कोर्ट के आदेश को रेलवे सुरक्षा और कानून के पालन के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। गैर-जमानती अपराध होने का अर्थ यह नहीं है कि जमानत मिल ही नहीं सकती; इस पर निर्णय अदालत संबंधित कानूनी प्रावधानों के अनुसार करती है।










