महादेवपुर में अखिल बिहार कवि सम्मेलन में सुजीत कुमार संगम ने जमाया रंग, काव्य पाठ की हुई सराहना
बांका। शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर महादेवपुर, अमरपुर के स्टेडियम में आयोजित अखिल बिहार कवि सम्मेलन में युवा कवि एवं शिक्षक सुजीत कुमार संगम ने अपने प्रभावशाली काव्य पाठ से खूब वाहवाही बटोरी। उनकी कविताओं ने दर्शकों को भावविभोर करने के साथ ही खूब गुदगुदाया। आयोजन समिति और उपस्थित श्रोताओं ने उनके काव्य पाठ की भूरि-भूरि प्रशंसा की।
कवि सम्मेलन में वरिष्ठ कवि विकास सिंह गुलटी, अंगिका सम्राट प्रो. मंजीत सिंह किनबार, गौरी तिवारी, पुर्णेंदु चौधरी और नागेंद्र मनी ने भी अपनी रचनाओं से श्रोताओं का भरपूर मनोरंजन किया। विभिन्न रसों से सजी कविताओं ने पूरे वातावरण को साहित्यिक रंगों से सराबोर कर दिया।
महादेवपुर के आतिथ्य और आत्मीयता से अभिभूत हुए सुजीत संगम
कवि सुजीत कुमार संगम ने आयोजन के बाद महादेवपुर की धरती, वहां के बुद्धिजीवियों और आयोजन समिति के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि आदरणीय गुरुदेव सरोज आचार्य और गुरु मां अजीता के स्नेह एवं आदेश पर उन्हें नवरात्र के अवसर पर अपनी काव्य संपदा के साथ महादेवपुर की ओजस्वी धरती का सानिध्य प्राप्त हुआ। उन्होंने महादेवपुर को पूज्य गुरुदेव दिव्यानंद देव का गांव बताते हुए वहां के लोगों की आत्मीयता और अतिथि सत्कार की मुक्तकंठ से प्रशंसा की।
उन्होंने कहा कि महादेवपुर ऐसा गांव है, जहां मिलने वाला प्रेम पल भर में अपना बना लेता है और लोगों का स्नेह वहां से लौटने का मन नहीं होने देता। आज के बाजारवाद के दौर में भी अतिथि सत्कार की परंपरा और सामाजिक-सांस्कृतिक आयोजनों में महिलाओं की समान भागीदारी देखनी हो, तो महादेवपुर आना चाहिए। यहां के लोगों का विशाल हृदय और अपनत्व अनुकरणीय है।
कविताओं पर दर्शकों के चेहरों पर उभरे भाव
सुजीत संगम ने सम्मेलन के अनुभव साझा करते हुए कहा कि दर्शक दीर्घा रसज्ञ श्रोताओं से भरी हुई थी। विभिन्न रसों की कविताओं के दौरान श्रोताओं के चेहरों पर उभरने वाले निश्छल भाव ऐसा अनुभव करा रहे थे, मानो समय कुछ पल के लिए ठहर गया हो। उन्होंने कहा कि चार-चार दौर तक फरमाइशी काव्य पाठ के बावजूद समय की सीमा के कारण उन्हें अपनी प्रस्तुति अधूरी छोड़नी पड़ी। हालांकि, अपने पीछे थोड़ी-सी काव्य प्यास छोड़ आने का उन्हें संतोष है और उम्मीद है कि यह आत्मीयता उन्हें दोबारा महादेवपुर बुलाएगी।
अंत में युवा कवि ने बांका की मिट्टी, महादेवपुर के बुद्धिजीवियों, आयोजन समिति और समस्त श्रोताओं के प्रति आभार व्यक्त करते हुए सादर प्रणाम किया। उन्होंने कहा कि महादेवपुर का प्रेम, साहित्य के प्रति सम्मान और सांस्कृतिक चेतना हमेशा स्मरणीय रहेगी।










