भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी! आरपीएफ की जगह सीआईएसएफ को सौंपी जा सकती है रेल सुरक्षा की कमान आरपीएफ पर अधिकारों के दुरुपयोग और दुर्व्यवहार के आरोपों के बीच उठी नई व्यवस्था की मांग, राज्यसभा में भी उठ सकता है मामला
रिपोर्ट नवीन यादव
नई दिल्ली। भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार के स्तर पर एक बड़े बदलाव की चर्चा सामने आ रही है। सूत्रों के अनुसार, आने वाले समय में देश की रेल संपत्तियों और रेल यात्रियों की सुरक्षा की पूरी जिम्मेदारी केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) को सौंपने के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है। हालांकि, इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक निर्णय सामने नहीं आया है।
वर्तमान में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) रेल मंत्रालय के अधीन काम करता है और रेलवे की संपत्तियों की सुरक्षा के साथ-साथ रेलवे परिसरों तथा ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में आरपीएफ के कुछ जवानों पर अधिकारों के कथित दुरुपयोग और यात्रियों तथा रेल कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार के आरोप लगते रहे हैं। इन शिकायतों के बीच रेलवे सुरक्षा व्यवस्था की जिम्मेदारी किसी अन्य केंद्रीय सुरक्षा बल को सौंपने की संभावना को लेकर चर्चा तेज होने की बात कही जा रही है।
इस बड़े बदलाव की मुख्य वजहें
जवानों के खिलाफ शिकायतें और दुर्व्यवहार के आरोप
पिछले तीन वर्षों के दौरान रेलवे परिसरों में तैनात आरपीएफ जवानों के खिलाफ अधिकारों के कथित दुरुपयोग और यात्रियों तथा रेल कर्मचारियों के साथ दुर्व्यवहार से संबंधित कई शिकायतें सामने आने की बात कही जा रही है। इन शिकायतों ने रेलवे सुरक्षा बल की कार्यप्रणाली और जवाबदेही को लेकर सवाल खड़े किए हैं।
आरा रेलवे स्टेशन की घटना से बढ़ी बहस
हाल ही में आरा रेलवे स्टेशन पर आरपीएफ कर्मियों द्वारा एक रेल कर्मचारी के साथ कथित तौर पर मारपीट करने और उसे घसीटने का मामला सामने आने के बाद रेलवे सुरक्षा व्यवस्था को लेकर बहस और तेज हो गई। इस घटना ने आरपीएफ की कार्यप्रणाली और जवानों के व्यवहार को लेकर एक बार फिर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, मामले की वास्तविक स्थिति जांच और आधिकारिक रिपोर्ट के बाद ही पूरी तरह स्पष्ट हो सकेगी।
मेट्रो सुरक्षा का सफल मॉडल
देश के अधिकांश प्रमुख मेट्रो स्टेशनों की सुरक्षा व्यवस्था केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल के जिम्मे है। मेट्रो परिसरों में सुरक्षा जांच, प्रवेश नियंत्रण, निगरानी और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल के कारण सीआईएसएफ की सुरक्षा व्यवस्था को अपेक्षाकृत पेशेवर और प्रभावी मॉडल के रूप में देखा जाता है। इसी मॉडल को रेलवे में लागू करने की संभावनाओं पर भी विचार किए जाने की चर्चा है।
यदि बदलाव हुआ तो क्या पड़ेगा असर?
रेलवे सुरक्षा का नियंत्रण गृह मंत्रालय के अधीन आने की संभावना
वर्तमान में आरपीएफ रेल मंत्रालय के अधीन कार्य करता है, जबकि केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल केंद्रीय गृह मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण में है। यदि रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था की कमान सीआईएसएफ को सौंपी जाती है तो रेलवे सुरक्षा के संचालन और प्रशासनिक नियंत्रण की व्यवस्था में बड़ा बदलाव हो सकता है तथा इसमें गृह मंत्रालय की भूमिका बढ़ सकती है।
रेलवे में लागू हो सकता है सुरक्षा का नया ढांचा
सीआईएसएफ को हवाई अड्डों, औद्योगिक प्रतिष्ठानों, महत्वपूर्ण सरकारी संस्थानों और अन्य संवेदनशील परिसरों की सुरक्षा का लंबा अनुभव है। ऐसे में यदि रेलवे सुरक्षा की जिम्मेदारी सीआईएसएफ को दी जाती है तो रेलवे स्टेशनों और महत्वपूर्ण रेल परिसंपत्तियों पर आधुनिक तकनीकी निगरानी, प्रवेश नियंत्रण, सुरक्षा जांच और निगरानी तंत्र को और मजबूत किए जाने की संभावना हो सकती है।
आरपीएफ की भूमिका में भी हो सकता है बदलाव
यदि सुरक्षा की पूरी कमान सीआईएसएफ को देने का निर्णय लिया जाता है तो आरपीएफ की वर्तमान भूमिका, अधिकार क्षेत्र और कार्यप्रणाली में भी बदलाव संभव है। हालांकि, इस संबंध में किसी भी संभावित व्यवस्था का अंतिम स्वरूप सरकार के निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा।
राज्यसभा में उठ सकता है मामला
इस पूरे मुद्दे को लेकर राज्यसभा में भी सवाल उठाए जाने की संभावना जताई जा रही है। सदन में रेलवे सुरक्षा बल की वर्तमान व्यवस्था, उसके अधिकार क्षेत्र, कथित अधिकारों के दुरुपयोग और यात्रियों तथा रेल कर्मचारियों के साथ व्यवहार से जुड़े मामलों पर सरकार से जवाब मांगा जा सकता है।
अभी अंतिम फैसला नहीं
महत्वपूर्ण बात यह है कि वर्तमान में रेलवे सुरक्षा की कमान सीआईएसएफ को सौंपने का कोई अंतिम निर्णय नहीं हुआ है। बताया जा रहा है कि मामला अभी शुरुआती समीक्षा और संभावित विकल्पों पर विचार के स्तर पर है। राज्यसभा में सरकार की ओर से दिए जाने वाले जवाब और आगे की प्रक्रिया के बाद ही तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। किसी भी बड़े नीतिगत बदलाव को लागू करने से पहले निर्धारित सरकारी प्रक्रिया का पालन करना होगा और आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करनी होंगी।
यदि केंद्र सरकार भविष्य में इस प्रस्ताव को आगे बढ़ाती है और इसे मंजूरी मिलती है, तो यह भारतीय रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था में अब तक के सबसे बड़े बदलावों में से एक हो सकता है।