आगरा कैंट में डीएसएस की पिटाई, आरपीएफ के चार कर्मी दोषी दो एएसआई समेत चार की भूमिका जांच में कटघरे में, ड्यूटी की मर्यादा पर उठे सवाल ट्रेन रुकवाने को लेकर शुरू हुआ विवाद, नरेंद्र सिंह चाहर से मारपीट और घसीटने का आरोप निलंबन के बाद जांच पूरी, अब अंतिम विभागीय कार्रवाई पर निगाह
रिपोर्ट नवीन यादव
आगरा। आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर डिप्टी स्टेशन अधीक्षक (डीएसएस) नरेंद्र सिंह चाहर के साथ मारपीट का मामला रेलवे महकमे में लंबे समय से चर्चा में है। ट्रेन रुकवाने को लेकर शुरू हुए विवाद में आरपीएफ कर्मियों पर डीएसएस के साथ मारपीट और उन्हें घसीटकर आरपीएफ पोस्ट तक ले जाने के आरोप लगे थे। मामले की जांच के बाद आरपीएफ के दो एएसआई समेत चार कर्मियों की भूमिका को दोषपूर्ण माना गया है।
घटना 12 जुलाई को हीराकुंड एक्सप्रेस के ठहराव के दौरान हुई थी। रिपोर्टों के अनुसार एक महिला यात्री ट्रेन में चढ़ने से रह गई थी। उसे ट्रेन में चढ़ाने के लिए ड्यूटी पर मौजूद डीएसएस ने ट्रेन रुकवाने की सूचना दी। इसी घटनाक्रम को लेकर आरपीएफ कर्मियों और डीएसएस के बीच विवाद बढ़ गया। आरोप है कि कहासुनी के बाद आरपीएफ कर्मियों ने नरेंद्र सिंह चाहर के साथ मारपीट की और उन्हें प्लेटफॉर्म पर गिराकर घसीटते हुए आरपीएफ पोस्ट तक ले गए। घटना का वीडियो सामने आने के बाद मामला और गरमा गया।
मामले में एएसआई मेघराज मीणा, एएसआई बालकिशन, कांस्टेबल जितेंद्र और कांस्टेबल बदन सिंह के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। चारों को निलंबित कर अलग-अलग स्थानों पर संबद्ध किया गया। इसके बाद पूरे घटनाक्रम की जांच के लिए समिति गठित की गई।
जांच के दौरान संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान लिए गए तथा स्टेशन पर उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल की गई। समिति ने घटनाक्रम में चारों आरपीएफ कर्मियों की भूमिका को दोषपूर्ण माना। जांच रिपोर्ट के आधार पर अब आगे की विभागीय कार्रवाई की जानी है।
घटना के बाद डीएसएस नरेंद्र सिंह चाहर की मेडिकल जांच भी कराई गई थी। प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक मेडिकल जांच में उनके कान का पर्दा फटने की बात सामने आई थी। उनकी शिकायत पर चार आरपीएफ कर्मियों के खिलाफ जीआरपी आगरा कैंट थाने में मुकदमा दर्ज किया गया था।
मामले में बाद में एएसआई मेघराज मीणा की ओर से भी डीएसएस नरेंद्र सिंह चाहर समेत 10 लोगों के खिलाफ शिकायत की गई। आरोप लगाया गया कि विवाद के दौरान आरपीएफ कर्मियों के साथ भी हाथापाई हुई और वर्दी फाड़ी गई। अदालत के आदेश पर इस शिकायत पर भी मुकदमा दर्ज कर जांच के निर्देश दिए गए।
आगरा कैंट का यह विवाद अब विभागीय जांच और दोनों पक्षों की कानूनी कार्रवाई के दायरे में है। जांच समिति द्वारा चार आरपीएफ कर्मियों को दोषी माने जाने के बाद अब अंतिम विभागीय दंड पर रेलवे प्रशासन के निर्णय का इंतजार है।
रिपोर्ट: नवीन यादव










