पीआरओ मनोज कुमार सिंह—जिन्होंने पत्रकारिता में सिर्फ राह नहीं दिखाई, बल्कि शब्दों को जिम्मेदारी से निभाना सिखाया कुछ लोग जिंदगी में सिर्फ मिलते नहीं, बल्कि हमारी सोच को आकार देते हैं, हमारी राह को दिशा देते हैं और अपने अनुभवों से हमें बहुत कुछ सिखाकर जाते हैं। ऐसे व्यक्तित्व हमारे जीवन में गुरु का स्थान पा लेते हैं
रिपोर्ट नवीन यादव
पत्रकारिता मेरे लिए केवल एक पेशा नहीं, बल्कि सत्य, संवेदना और समाज के प्रति जिम्मेदारी निभाने का माध्यम है। इस सफर में किताबों और अनुभवों के साथ ऐसे लोगों से भी बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला, जिनके मार्गदर्शन ने पत्रकारिता को समझने की मेरी दृष्टि को और बेहतर बनाया।
उत्तर मध्य रेलवे, झांसी मंडल के जनसंपर्क अधिकारी मनोज कुमार सिंह मेरे पत्रकारिता जीवन में ऐसे ही मार्गदर्शक व्यक्तित्व हैं। उनके सहज व्यवहार, सहयोग की भावना और पत्रकारिता की बारीकियों को समझने के दृष्टिकोण से मुझे समय-समय पर बहुत कुछ सीखने का अवसर मिला है।
कभी-कभी गुरु किसी कक्षा में नहीं मिलता। वह किसी किताब के पन्नों में भी नहीं होता। गुरु तो वह होता है, जिसके अनुभव से हमें नई राह मिलती है, जिसके शब्द हमें सोचने पर मजबूर करते हैं और जिसके व्यवहार से जीवन में कुछ बेहतर करने की प्रेरणा मिलती है।
गुरु केवल वह नहीं, जो हमें कक्षा में पढ़ाते हैं,
गुरु हर वह व्यक्ति है, जिससे हम जीवन में कुछ सीखते हैं।
मनोज कुमार सिंह से मिली सीख मेरे लिए केवल पत्रकारिता तक सीमित नहीं है। संवाद की गरिमा, परिस्थितियों को समझना, शब्दों की जिम्मेदारी और अपने कार्य के प्रति सजग रहना—ये ऐसी बातें हैं, जिनका महत्व पत्रकारिता के हर पड़ाव पर महसूस होता है।
आज शिक्षक दिवस के अवसर पर उन सभी गुरुजनों, शिक्षकों और मार्गदर्शकों को हृदय से नमन, जिन्होंने मेरे जीवन और पत्रकारिता के सफर में प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से मेरा मार्गदर्शन किया।
कुछ ऋण ऐसे होते हैं, जिन्हें शब्दों में चुकाया नहीं जा सकता। गुरु का ऋण भी उन्हीं में से एक है। उनके द्वारा दी गई सीख ही जीवन की वह पूंजी है, जो समय के साथ और मूल्यवान होती जाती है।
समस्त गुरुजनों को सादर प्रणाम।
आपका आशीर्वाद, स्नेह और मार्गदर्शन सदैव बना रहे।
🙏 शिक्षक दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं एवं शत-शत नमन। 🙏
— नवीन यादव










