डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर से बदली देश के माल परिवहन की तस्वीर तेज रफ्तार मालगाड़ियों से लॉजिस्टिक्स को नई ताकत, मौजूदा रेल नेटवर्क पर घटा माल यातायात का दबाव
रिपोर्ट नवीन यादव
भारत के माल परिवहन परिदृश्य में समर्पित मालवाहक गलियारों (डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर) के परिचालन से बड़ा बदलाव आया है। इन गलियारों का उद्देश्य देश के प्रमुख औद्योगिक, विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स केंद्रों के बीच उच्च क्षमता, तेज, कुशल और विश्वसनीय रेल माल परिवहन सुविधा उपलब्ध कराना है।
वर्तमान में देश में दो प्रमुख डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर संचालित हैं। ईस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर लगभग 1,337 किलोमीटर लंबा है, जो पंजाब के न्यू साहनेवाल से शुरू होकर हरियाणा और उत्तर प्रदेश से होते हुए बिहार के न्यू सोननगर तक जुड़ता है। वहीं वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर लगभग 1,506 किलोमीटर लंबा है, जो उत्तर प्रदेश के न्यू दादरी से हरियाणा, राजस्थान और गुजरात होते हुए महाराष्ट्र के न्यू जेएनपीटी तक विस्तारित है।
इसके अलावा, इसी वर्ष बजट में देश के लिए तीसरे डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर की घोषणा की गई है। प्रस्तावित गलियारा पश्चिम बंगाल के दानकुनी से शुरू होकर झारखंड, छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र से होते हुए गुजरात को जोड़ेगा।
ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर मिलकर लगभग 2,843 किलोमीटर लंबा उच्च क्षमता वाला समर्पित रेल मालवाहक नेटवर्क तैयार करते हैं। यह नेटवर्क देश के प्रमुख औद्योगिक और विनिर्माण क्षेत्रों को महत्वपूर्ण लॉजिस्टिक्स केंद्रों तथा बंदरगाहों से जोड़कर माल की तेज और सुगम आवाजाही को बढ़ावा दे रहा है।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर के माध्यम से डबल स्टैक कंटेनर ट्रेनें देश के महत्वपूर्ण बंदरगाहों तक सीधे पहुंच पा रही हैं। इससे माल परिवहन की गति और क्षमता दोनों में वृद्धि हुई है। साथ ही, मालगाड़ियों के लिए अलग समर्पित मार्ग उपलब्ध होने से मौजूदा रेल नेटवर्क पर माल यातायात का दबाव कम करने में भी मदद मिल रही है।
माल यातायात का एक बड़ा हिस्सा समर्पित गलियारों पर स्थानांतरित होने से मौजूदा रेल लाइनों पर अतिरिक्त क्षमता उपलब्ध हो रही है। इसका सीधा लाभ यात्री ट्रेनों के संचालन को मिल सकता है, जिससे रेल परिवहन व्यवस्था की समग्र क्षमता और परिचालन दक्षता में सुधार होता है।
डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर केवल मालगाड़ियों की रफ्तार बढ़ाने वाली परियोजना नहीं, बल्कि देश की लॉजिस्टिक्स व्यवस्था, आपूर्ति श्रृंखला और औद्योगिक विकास को गति देने वाली महत्वपूर्ण आधारभूत संरचना के रूप में उभर रहा है। ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर भारत के माल परिवहन तंत्र को अधिक आधुनिक, कुशल और प्रतिस्पर्धी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।










