9 घंटे की ड्यूटी का प्रावधान, फिर लोको पायलटों से ज्यादा ड्यूटी क्यों? AIRF महासचिव एवं NRMU के नेता शिव गोपाल मिश्रा ने GM-PNM बैठक में रेलवे प्रशासन के सामने उठाया लंबी ड्यूटी का मुद्दा दो टूक—निर्धारित ड्यूटी अवधि का हो पालन, लोको पायलटों से अतिरिक्त ड्यूटी लेने पर उठे सवाल रेल संचालन और सुरक्षा से जुड़ा मामला, कर्मचारियों के कार्य घंटे पर प्रशासन से स्पष्ट व्यवस्था की मांग
नई दिल्ली। उत्तर रेलवे की GM-PNM बैठक में ऑल इंडिया रेलवेमेंस फेडरेशन (AIRF) के महासचिव एवं नॉर्दर्न रेलवे मेंस यूनियन (NRMU) से जुड़े प्रमुख नेता शिव गोपाल मिश्रा ने लोको पायलटों के लंबे ड्यूटी आवर्स का मुद्दा पूरी मजबूती से उठाया। उन्होंने रेलवे प्रशासन के सामने सीधा सवाल रखा कि जब ड्यूटी के लिए 9 घंटे का निर्धारित प्रावधान है, तो लोको पायलटों से इससे अधिक समय तक ड्यूटी क्यों ली जा रही है?
मिश्रा ने कहा कि लोको पायलटों की जिम्मेदारी सीधे रेल संचालन और यात्रियों की सुरक्षा से जुड़ी है। ऐसे में निर्धारित ड्यूटी अवधि से अधिक काम कराया जाना केवल कर्मचारी हित का विषय नहीं, बल्कि सुरक्षित रेल संचालन से जुड़ा महत्वपूर्ण सवाल भी है।
नियम 9 घंटे का तो पालन भी उसी का हो
बैठक में AIRF महासचिव ने रेलवे प्रशासन को स्पष्ट रूप से याद दिलाया कि यदि ड्यूटी के लिए निर्धारित सीमा 9 घंटे है, तो उसका व्यवहारिक स्तर पर भी पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि नियम और प्रावधान केवल कागजों तक सीमित नहीं रहने चाहिए।
लोको पायलटों पर अतिरिक्त कार्यभार क्यों?
मिश्रा ने लंबे ड्यूटी आवर्स को लेकर प्रशासन से जवाबदेही तय करने की मांग की। उनका कहना था कि लोको पायलटों पर लगातार अतिरिक्त कार्यभार डालने के बजाय ड्यूटी और विश्राम की व्यवस्था निर्धारित प्रावधानों के अनुरूप रखी जानी चाहिए।
सुरक्षित रेल संचालन से सीधे जुड़ा मुद्दा
GM-PNM बैठक में उठाए गए इस मुद्दे ने लोको पायलटों के कार्य घंटे और सुरक्षित रेल संचालन के बीच संतुलन को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया। मिश्रा ने रेलवे प्रशासन से मांग की कि लोको पायलटों की ड्यूटी अवधि के संबंध में निर्धारित प्रावधानों का सख्ती से पालन कराया जाए, ताकि कर्मचारियों पर अनावश्यक अतिरिक्त कार्यभार न पड़े और सुरक्षित रेल संचालन की व्यवस्था मजबूत बनी रहे।










