मेजर गरिमा यादव बनीं उत्तर प्रदेश के राज्यपाल की पहली महिला आर्मी ADC
रिपोर्ट नवीन यादव
14 सितंबर 2025 को संभाली जिम्मेदारी, भारतीय सेना की आर्मी सर्विस कोर में हैं अधिकारी; CDS परीक्षा में हासिल की थी ऑल इंडिया रैंक-2
लखनऊ। भारतीय सेना की अधिकारी मेजर गरिमा यादव ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल के एड-डी-कैंप (ADC) के रूप में नियुक्त होकर महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, वह उत्तर प्रदेश के राज्यपाल की ADC बनने वाली भारतीय सेना की पहली महिला अधिकारी हैं। उन्होंने 14 सितंबर 2025 को इस प्रतिष्ठित पद की जिम्मेदारी संभाली थी। उनकी यह उपलब्धि सशस्त्र बलों में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी और नेतृत्व क्षमता को दर्शाती है।
मेजर गरिमा यादव भारतीय सेना की आर्मी सर्विस कोर (ASC) से जुड़ी हैं। यह सेना की महत्वपूर्ण शाखा है, जो सैन्य अभियानों के लिए आवश्यक रसद, आपूर्ति और परिवहन संबंधी व्यवस्थाओं में अहम भूमिका निभाती है। राज्यपाल की ADC के रूप में अधिकारी को आधिकारिक कार्यक्रमों, समारोहों, प्रोटोकॉल और विभिन्न आयोजनों के समन्वय में सहयोग करना होता है।
सेंट स्टीफंस कॉलेज से की पढ़ाई
उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, मेजर गरिमा यादव ने नई दिल्ली के प्रतिष्ठित सेंट स्टीफंस कॉलेज से अर्थशास्त्र में स्नातक की पढ़ाई की। उन्होंने संयुक्त रक्षा सेवा (CDS) परीक्षा-2017 में अखिल भारतीय स्तर पर दूसरी रैंक हासिल की थी। इसके बाद उन्होंने सर्विसेज सेलेक्शन बोर्ड (SSB) की चयन प्रक्रिया में सफलता प्राप्त की।
उन्होंने चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग अकादमी (OTA) में सैन्य प्रशिक्षण पूरा किया और 9 मार्च 2019 को भारतीय सेना में कमीशन प्राप्त किया। सेना में अधिकारी के रूप में सेवा शुरू करने के बाद उन्होंने अपने पेशेवर दायित्वों के माध्यम से आगे बढ़ते हुए यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी हासिल की।
महिला अधिकारियों के लिए प्रेरणादायक उपलब्धि
मेजर गरिमा यादव की नियुक्ति को सेना में महिलाओं के लिए नए अवसरों और बढ़ती जिम्मेदारियों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ADC जैसे प्रतिष्ठित पद पर उनकी नियुक्ति सैन्य अधिकारियों की पेशेवर योग्यता, अनुशासन और नेतृत्व क्षमता को रेखांकित करती है।
स्रोत संबंधी जानकारी: यह समाचार उपलब्ध मीडिया रिपोर्टों पर आधारित है। नियुक्ति की तारीख और उत्तर प्रदेश के राज्यपाल की पहली महिला आर्मी ADC होने के दावे की राजभवन या भारतीय सेना के आधिकारिक आदेश से स्वतंत्र पुष्टि उपलब्ध नहीं हो सकी है।










