जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद तीर्थ महाराज का संघर्ष सेवा समिति कार्यालय में हुआ भव्य स्वागत एवं सम्मान डॉ. संदीप सरावगी के समाजसेवी कार्यों की सराहना, आध्यात्मिक परंपराओं और जनसेवा के समन्वय पर हुआ आत्मीय संवाद

झांसी। सनातन धर्म की समृद्ध आध्यात्मिक परंपरा, भारतीय संस्कृति और धार्मिक चेतना के संवाहक जगद्गुरु शंकराचार्य स्वामी ज्ञानानंद जी तीर्थ महाराज के संघर्ष सेवा समिति कार्यालय पहुंचने पर श्रद्धा, सम्मान और आत्मीयता के साथ उनका स्वागत किया गया। इस अवसर पर तिलक एवं माल्यार्पण कर उनका अभिनंदन किया गया तथा स्मृति चिह्न भेंट कर सम्मानित किया गया।

धार्मिक एवं आध्यात्मिक परंपराओं से जुड़े स्वामी ज्ञानानंद जी तीर्थ महाराज का आगमन समिति के सदस्यों के लिए गौरव और सौभाग्य का अवसर रहा। उनके स्वागत के दौरान भारतीय संस्कृति, सनातन धर्म के आदर्शों और समाज में सेवा, सद्भाव एवं मानवीय मूल्यों की स्थापना जैसे विषयों की गरिमा विशेष रूप से परिलक्षित हुई।

इस अवसर पर संघर्ष सेवा समिति के संस्थापक डॉ. संदीप सरावगी द्वारा समाजहित में किए जा रहे सेवा कार्यों की स्वामी जी ने सराहना की। समाज के जरूरतमंद वर्गों के सहयोग, मानवीय संवेदनाओं के सम्मान और जनकल्याण के लिए किए जा रहे प्रयासों को सामाजिक उत्तरदायित्व की महत्वपूर्ण अभिव्यक्ति के रूप में देखा गया। जनसेवा के ऐसे कार्य समाज में सहयोग, समरसता और परस्पर विश्वास की भावना को सुदृढ़ करते हैं।

कार्यक्रम का वातावरण श्रद्धा, आध्यात्मिक गरिमा और आत्मीयता से परिपूर्ण रहा। संतों का सान्निध्य भारतीय जीवन-दर्शन में सदैव प्रेरणा का स्रोत रहा है। उनकी उपस्थिति न केवल आध्यात्मिक चेतना को जागृत करती है, बल्कि समाज को सेवा, सदाचार और परोपकार के मार्ग पर आगे बढ़ने का संदेश भी देती है।

संघर्ष सेवा समिति कार्यालय में आयोजित यह स्वागत एवं सम्मान समारोह आध्यात्मिक परंपरा और सामाजिक सेवा के सुंदर समन्वय का प्रतीक बना। इस अवसर पर राजू सेन, बसंत गुप्ता, सुशांत खेड़ा, महेश पटेरिया, मुन्ना मास्टर, प्रमेन्द्र सिंह, दीपक त्रिपाठी आदि उपस्थित रहे।

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