विश्व आम दिवस: दो दर्जन से अधिक प्रजातियों के स्वाद से भरे हैं बिजनौर के बाग, खाड़ी देशों में जाता है लंगड़ा और बनारसी आम

बिजनौर जिले में आम की खेती प्रमुख है जहाँ नौ हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि पर आम के बाग हैं। यहाँ दो दर्जन से ज्यादा किस्मों के आम पाए जाते हैं जिनकी मांग देश और खाड़ी देशों तक है। लंगड़ा दशहरी चौसा जैसे आमों के बाग अभी भी लहलहा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश का बिजनौर जिला आम की खेती के लिए खास पहचान रखता है। यहाँ नौ हजार हेक्टेयर से अधिक भूमि पर फैले आम के बाग न केवल क्षेत्र की हरियाली बढ़ाते हैं, बल्कि किसानों की आर्थिक रीढ़ भी बने हुए हैं। अनुकूल जलवायु, उपजाऊ मिट्टी और वर्षों पुरानी खेती की परंपरा ने बिजनौर को आम उत्पादन का एक महत्वपूर्ण केंद्र बना दिया है।

बिजनौर में दो दर्जन से अधिक किस्मों के आम उगाए जाते हैं, जिनमें लंगड़ा आम, दशहरी आम और चौसा आम प्रमुख हैं। इन किस्मों की मिठास, सुगंध और स्वाद के कारण इनकी मांग देश के साथ-साथ खाड़ी देशों तक फैली हुई है। खासतौर पर लंगड़ा और दशहरी आम अपने विशिष्ट स्वाद के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी पसंद किए जाते हैं।

यहाँ के आम के बाग आज भी पारंपरिक तरीके से संजोकर रखे गए हैं। कई बाग दशकों पुराने हैं, जिनकी देखभाल पीढ़ी दर पीढ़ी होती आ रही है। इन बागों में गर्मियों के मौसम में हरियाली के बीच लटकते आम न सिर्फ किसानों के लिए आमदनी का स्रोत होते हैं, बल्कि क्षेत्र की सांस्कृतिक पहचान का भी हिस्सा हैं।

बिजनौर के किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाते हुए उत्पादन और गुणवत्ता दोनों में सुधार कर रहे हैं। ड्रिप इरिगेशन, जैविक खाद और उन्नत प्रबंधन तकनीकों के उपयोग से आम की पैदावार बढ़ रही है। साथ ही, निर्यात के लिए बेहतर पैकिंग और ग्रेडिंग पर भी ध्यान दिया जा रहा है, जिससे विदेशी बाजारों में प्रतिस्पर्धा बनी रहे।

कुल मिलाकर, बिजनौर का आम उद्योग न केवल स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करता है, बल्कि भारत की कृषि पहचान को वैश्विक स्तर पर भी स्थापित करने में अहम भूमिका निभा रहा है। यहाँ के लहलहाते आम के बाग आने वाले समय में भी इस जिले की समृद्धि और प्रसिद्धि का आधार बने रहेंगे।

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