होर्मुज में संघर्ष… अमेरिका ने ईरान की 6 नावों को उड़ाने का किया दावा, IRGC ने बताया झूठा
अमेरिकी सेना ने ईरान की छह छोटी नावों को नष्ट करने और क्रूज मिसाइलों व ड्रोन को रोकने का दावा किया है। राष्ट्रपति ट्रंप ने होर्मुज जलडमरूमध्य का नियंत्रण वापस लेने के लिए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ ऑपरेशन शुरू किया है।
पश्चिम एशिया में एक बार फिर तनाव तेजी से बढ़ता नजर आ रहा है। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि उसने ईरान की छह छोटी नावों को नष्ट कर दिया है, साथ ही क्षेत्र में दागी गई क्रूज मिसाइलों और ड्रोन हमलों को भी सफलतापूर्वक रोक दिया गया। यह घटनाक्रम वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ाने वाला माना जा रहा है, क्योंकि इससे खाड़ी क्षेत्र की सुरक्षा और स्थिरता पर सीधे असर पड़ सकता है।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ये नावें कथित तौर पर खतरनाक गतिविधियों में शामिल थीं और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में तैनात अमेरिकी जहाजों के लिए खतरा पैदा किया था। जवाबी कार्रवाई में अमेरिकी नौसेना ने तेजी से ऑपरेशन चलाकर इन नौकाओं को निष्क्रिय कर दिया। इसके साथ ही, हवा में सक्रिय रक्षा प्रणाली के जरिए मिसाइल और ड्रोन हमलों को विफल कर दिया गया।
इस बीच, डोनाल्ड ट्रंप ने एक बड़े सैन्य अभियान “प्रोजेक्ट फ्रीडम” की शुरुआत की घोषणा की है। इस ऑपरेशन का उद्देश्य होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण सुनिश्चित करना और अंतरराष्ट्रीय व्यापार मार्गों की सुरक्षा को बहाल करना बताया जा रहा है। ट्रंप ने कहा कि अमेरिका किसी भी कीमत पर इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग को बाधित नहीं होने देगा।
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल परिवहन मार्गों में से एक है, जहां से बड़ी मात्रा में कच्चा तेल वैश्विक बाजारों तक पहुंचता है। ऐसे में यहां किसी भी तरह का सैन्य तनाव न केवल क्षेत्रीय बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर स्थिति और बिगड़ती है, तो तेल की कीमतों में उछाल और सप्लाई चेन पर दबाव देखने को मिल सकता है।
दूसरी ओर, ईरान की तरफ से इस पूरे घटनाक्रम पर अभी तक आधिकारिक प्रतिक्रिया सीमित रही है, लेकिन क्षेत्र में उसकी सैन्य गतिविधियों को लेकर पहले से ही संदेह बना हुआ है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार दोनों पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील कर रहा है।
संयुक्त राष्ट्र और अन्य वैश्विक संगठनों ने भी इस स्थिति पर चिंता जताई है। उनका कहना है कि किसी भी प्रकार का सैन्य टकराव पूरे मध्य-पूर्व क्षेत्र को अस्थिर कर सकता है, जिससे मानवीय और आर्थिक संकट गहरा सकता है।
कुल मिलाकर, अमेरिकी कार्रवाई और “प्रोजेक्ट फ्रीडम” ऑपरेशन की शुरुआत ने खाड़ी क्षेत्र में तनाव को नई दिशा दे दी है। आने वाले दिनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या दोनों देश बातचीत के जरिए समाधान निकालते हैं या स्थिति और अधिक गंभीर रूप लेती है। फिलहाल, दुनिया की नजरें इस संवेदनशील क्षेत्र पर टिकी हुई हैं।










