यूपी में व्यापारियों के माल भेजने और मंगाने के नियमों में बदलाव, अब GST बिल में देनी होगी एड्रेस समेत पूरी जानकारी
जीएसटी प्रणाली ने ई-वे बिल नियमों में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिससे माल भेजने और मंगाने की प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और सुरक्षित होगी। अब डिलीवरी स्थान की घोषणा और ई-वे बिल को बंद करने की सुविधा विक्रेता, खरीदार और ट्रांसपोर्टर सभी को मिलेगी।
व्यापारियों के माल भेजने और मंगाने के नियमों में अहम बदलाव किया गया है। वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) प्रणाली की ओर से 20 मई 2026 को नई एडवाइजरी जारी की गई है जिसका मकसद ई-वे बिल प्रणाली को अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाना है। इसके तहत प्रमुख बदलाव माल पहुंचाने वाले स्थान की घोषणा है।
अब खरीदार के साथ ही माल की डिलीवरी लेने वाले की भी पहचान को घोषित करना जरूरी है। इसी तरह माल की डिलीवरी करने के बाद अब माल विक्रेता, खरीदार और ट्रक ड्राइवर भी ई-वे बिल को बंद कर सकता है। इससे ई- वे बिल के बार – बार प्रयोग के आरोप नहीं लग सकेंगे।
जीएसटी प्रणाली के अहम बदलाव पर चर्चा में कर सलाहकार फर्म एस. के. गुप्ता एंड कंपनी के एडवोकेट संतोष कुमार गुप्ता ने बताया कि पहले की व्यवस्था के अनुसार, यदि कोई व्यापारी 50,000 या उससे अधिक मूल्य के करयोग्य माल की बिक्री मोटर वाहन के जरिए करता था, तो ई-वे बिल जनरेट करना अनिवार्य होता था।
यदि खरीदार जीएसटी में पंजीकृत नहीं होता था, तो उसके नाम के आगे ‘यूआरपी’ (अपंजीकृत व्यक्ति ) अंकित किया जाता था। जीएसटी मामलों के विशेषज्ञ सीए नितिन सिंह के अनुसार कई बार देखा गया कि खरीदार कंपनी या व्यक्ति कोई है और माल की डिलीवरी किसी अन्य पते पर कराई जा रही है। इससे वास्तविक खरीदार का पता करना मुश्किल हो जाता था।
माल की डिलीवरी खरीदार के पते के बजाय किसी अन्य स्थान पर की जा रही हो, तो इनवायस और ई-वे बिल में उस वैकल्पिक स्थान का पता डालना तो अनिवार्य था, लेकिन वहां की पंजीकरण संख्या (जीएसटीएन) डालना अनिवार्य नहीं था। अब माल डिलीवरी वाले स्थान का भी जीएसटी नंबर डालना होगा। अगर स्थान ऐसा है जिसका जीएसटी में पंजीकरण नहीं है तो यूआरपी लिखा जाएगा।
इसी तरह से माल डिलीवरी के बाद ई-वे बिल को पोर्टल पर ‘बंद’ करने की सुविधा भी नई जोड़ी गई है। इसके तहत अब माल के अपने गंतव्य स्थान पर सुरक्षित पहुंचने और डिलीवरी पूरी होने के बाद, ई-वे बिल पोर्टल पर जाकर उसे ‘बंद’ करने का विकल्प मिलेगा।
एडवोकेट गुप्ता के अनुसार पोर्टल पर ई- वे बिल बंद करने का अधिकार विक्रेता, क्रेता, ट्रांसपोर्टर या वाहन चालक में से कोई भी कर सकता है। इससे ई-वे बिल का दुरुपयोग नहीं किया जा सकेगा। साथ ही जीएसटी के अधिकारी भी ई- वे बिल के दुरुपयोग का आधार बनाकर कार्रवाई नहीं कर सकेंगे।
आवश्यक एपीआई बदलाव अभी टेस्टिंग के दौर में जारी किए गए हैं। इन्हें 15 जून 2026 तक सुचारू रूप से लागू कर दिया जाएगा। -सीए नितिन सिंह, जीएसटी मामलों के विशेषज्ञ।
गाड़ियों के रास्ते में खराब होने अथवा जाम लगने की वजह से जब माल डिलीवरी में देरी होती है तो जीएसटी टीम की ओर से कार्रवाई की जाती रही है। अब इससे मुक्ति मिल सकेगी। -श्याम शुक्ला संरक्षक यू पी युवा ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन।
जीएसटी नियमों के नए बदलाव से माल मंगाने और भेजने में पारदर्शिता बढ़ जाएगी। माल डिलीवरी होने या प्राप्त करने के बाद ई- वे बिल बंद करने की सुविधा भी स्वागत योग्य है










