यूपी संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा-2026 में पहली बार हाईटेक सुरक्षा व्यवस्था लागू, बॉडी वॉर्न कैमरों से होगी लाइव मॉनिटरिंग

झांसी। उत्तर प्रदेश संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा-2026 के सफल, निष्पक्ष, पारदर्शी एवं सुरक्षित संचालन हेतु इस वर्ष विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा अत्याधुनिक तकनीक आधारित व्यापक सुरक्षा एवं निगरानी व्यवस्था लागू की जा रही है। प्रदेश के 72 जनपदों में आयोजित होने वाली इस परीक्षा के लिए कुल 1011 परीक्षा केंद्र बनाए गए हैं, जहां 4.45 लाख अभ्यर्थी परीक्षा में सम्मिलित होंगे। परीक्षा संचालन की निगरानी एवं समन्वय के लिए विभिन्न जनपदों एवं शहरों में कुल 170 विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों की तैनाती की गई है।

परीक्षा की गोपनीयता, सुरक्षा, पारदर्शिता एवं मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) के पूर्ण अनुपालन को सुनिश्चित करने के उद्देश्य से विश्वविद्यालय द्वारा पहली बार सभी विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों को अत्याधुनिक बॉडी वॉर्न कैमरे उपलब्ध कराए गए हैं। यह कैमरे केवल वीडियो रिकॉर्डिंग तक सीमित नहीं होंगे, बल्कि इनमें लाइव वीडियो स्ट्रीमिंग, ऑडियो रिकॉर्डिंग, टू-वे कम्युनिकेशन, जीपीएस आधारित लोकेशन ट्रैकिंग, इमरजेंसी अलार्म तथा इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर (ICCC) से सीधा डिजिटल कनेक्शन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध रहेंगी।

विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित ICCC (Integrated Command and Control Centre) से प्रदेशभर में कार्यरत सभी टीमों की गतिविधियों की रियल टाइम मॉनिटरिंग की जाएगी। यह नियंत्रण केंद्र परीक्षा प्रक्रिया के प्रत्येक चरण पर सतत निगरानी रखेगा तथा आवश्यकता पड़ने पर तत्काल दिशा-निर्देश भी जारी करेगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार यह हाईटेक निगरानी व्यवस्था परीक्षा से जुड़े कार्यों की मॉनिटरिंग परीक्षा के दिन 31 मई 2026 को प्रातः 4 बजे से प्रारंभ कर देगी। विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों के अपने निर्धारित स्थानों के लिए प्रस्थान करने से लेकर परीक्षा सामग्री प्राप्त करने, ट्रेजरी तक पहुंचने, प्रश्नपत्र एवं उत्तर पुस्तिकाओं को सुरक्षित रूप से विभिन्न परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने, परीक्षा संचालन की निगरानी करने तथा परीक्षा समाप्ति के पश्चात सामग्री को पुनः सुरक्षित रूप से संग्रहित कर विश्वविद्यालय नियंत्रण कक्ष तक वापस पहुंचाने तक प्रत्येक गतिविधि (गोपनीय सामग्री, प्रश्न पत्र , उत्तर पत्रक को छोड़ कर) की लाइव निगरानी की जाएगी। जीपीएस ट्रैकिंग प्रणाली के माध्यम से विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों एवं वाहनों की गतिविधियों पर लगातार नजर रखी जाएगी। यदि कोई वाहन अथवा टीम निर्धारित मार्ग से भटकती है या किसी असामान्य गतिविधि की संभावना उत्पन्न होती है, तो ICCC तत्काल उसकी पहचान कर संबंधित टीम को निर्देश जारी करेगा। इससे परीक्षा सामग्री की सुरक्षा एवं समयबद्ध संचालन सुनिश्चित किया जा सकेगा।

बॉडी वॉर्न कैमरों की सहायता से विश्वविद्यालय प्रतिनिधि परीक्षा केंद्रों पर होने वाली गतिविधियों की वीडियो / औडियो रिकॉर्डिंग भी कर सकेंगे। किसी विवादित परिस्थिति, अनुचित गतिविधि, अव्यवस्था, परीक्षा नियमों के उल्लंघन अथवा किसी भी प्रकार की शिकायत की स्थिति में रिकॉर्ड किया गया वीडियो महत्वपूर्ण साक्ष्य के रूप में उपयोग किया जा सकेगा। आवश्यकता पड़ने पर यह रिकॉर्डिंग न्यायिक अथवा प्रशासनिक प्रक्रिया में भी सहायक सिद्ध होगी।

इन कैमरों में उपलब्ध टू-वे कम्युनिकेशन सिस्टम के माध्यम से प्रतिनिधि सीधे ICCC से संपर्क स्थापित कर सकेंगे। किसी आपात स्थिति, सुरक्षा संबंधी समस्या, तकनीकी बाधा अथवा कानून-व्यवस्था की स्थिति उत्पन्न होने पर प्रतिनिधि तत्काल कंट्रोल रूम को सूचित कर आवश्यक सहायता प्राप्त कर सकेंगे। इसके अतिरिक्त कैमरों में इमरजेंसी अलार्म सुविधा sos भी उपलब्ध रहेगी, जिसके माध्यम से आकस्मिक स्थिति में तुरंत अलर्ट जारी किया जा सकेगा।

विश्वविद्यालय प्रशासन का मानना है कि यह तकनीकी व्यवस्था न केवल परीक्षा की सुरक्षा एवं गोपनीयता को और अधिक मजबूत बनाएगी, बल्कि परीक्षा प्रक्रिया को पूर्ण पारदर्शिता एवं जवाबदेही के साथ संचालित करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। आधुनिक तकनीक के इस प्रयोग से परीक्षा संचालन में मानवीय त्रुटियों की संभावना कम होगी तथा प्रत्येक गतिविधि का डिजिटल रिकॉर्ड उपलब्ध रहेगा।

विश्वविद्यालय द्वारा लागू की जा रही यह हाईटेक व्यवस्था उत्तर प्रदेश संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा-2026 को देश की सबसे सुरक्षित एवं तकनीकी रूप से उन्नत परीक्षाओं में शामिल करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

मुख्य लाभ

लाइव वीडियो स्ट्रीमिंग — परीक्षा केंद्रों पर होने वाली समस्त गतिविधियों की ICCC (Integrated Command and Control Centre) के माध्यम से रियल टाइम निगरानी संभव हुई, जिससे किसी भी अनियमितता पर तत्काल कार्रवाई की जा सकेगी ।

ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग — परीक्षा प्रक्रिया के प्रत्येक चरण का डिजिटल साक्ष्य उपलब्ध रहा। किसी विवाद, शिकायत अथवा नियम उल्लंघन की स्थिति में यह रिकॉर्डिंग न्यायिक एवं प्रशासनिक कार्रवाई में सहायक सिद्ध होगी।

GPS आधारित लोकेशन ट्रैकिंग — विश्वविद्यालय प्रतिनिधियों एवं परीक्षा सामग्री वाहनों की गतिविधियों पर निरंतर नजर रखी गई। निर्धारित मार्ग से किसी भी विचलन की स्थिति में ICCC द्वारा तत्काल सतर्कता जारी की गई।

टू-वे कम्युनिकेशन सिस्टम — प्रतिनिधि किसी भी आपात स्थिति में सीधे ICCC से संपर्क कर तत्काल दिशा-निर्देश एवं सहायता प्राप्त करने में सक्षम रहे।

SOS / इमरजेंसी अलार्म — किसी भी आकस्मिक सुरक्षा संबंधी स्थिति में प्रतिनिधियों द्वारा तुरंत अलर्ट जारी किया जा सका, जिससे प्रतिक्रिया समय न्यूनतम रहा।

ICCC से डिजिटल कनेक्शन — संपूर्ण परीक्षा प्रक्रिया का केंद्रीकृत डिजिटल नियंत्रण सुनिश्चित हुआ, जिससे मानवीय त्रुटियों की संभावना अत्यंत कम हो गई।

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