गरौठा विधानसभा: भाजपा का गढ़ या योगी फैक्टर? 2027 से पहले तेज हुई सियासी जंग
झांसी की गरौठा विधानसभा सीट एक बार फिर राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में है। बुंदेलखंड की इस महत्वपूर्ण सीट पर पिछले दो विधानसभा चुनावों से भारतीय जनता पार्टी का कब्जा है। वर्तमान में भाजपा के जवाहरलाल राजपूत लगातार दूसरी बार विधायक हैं। वहीं समाजवादी पार्टी 2027 के चुनाव में वापसी की उम्मीद लगाए हुए है।
गरौठा विधानसभा का राजनीतिक इतिहास काफी दिलचस्प रहा है। वर्ष 2012 में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता दीप नारायण सिंह यादव ने यहां जीत दर्ज की थी। इसके बाद 2017 और 2022 में भाजपा के जवाहरलाल राजपूत ने लगातार दो बार जीत हासिल की। इससे पहले यह सीट बसपा और कांग्रेस के खाते में भी जा चुकी है, जिससे स्पष्ट है कि यहां मतदाता समय-समय पर अलग-अलग दलों को मौका देते रहे हैं।
क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्याओं में पानी, सिंचाई, सड़क और रोजगार के मुद्दे शामिल रहे हैं। जब वर्तमान विधायक जवाहरलाल राजपूत से उनके कार्यकाल की उपलब्धियों के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कानून-व्यवस्था, सड़क निर्माण और पेयजल योजनाओं को अपनी प्रमुख उपलब्धियां बताया। उनका दावा है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में क्षेत्र में गुंडाराज समाप्त हुआ है और सड़कों का व्यापक जाल बिछाया गया है। उन्होंने यह भी कहा कि बेतवा और धसान नदियों सहित कई स्थानों पर पुलों का निर्माण कराया जा रहा है तथा हर घर नल योजना के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों तक पेयजल पहुंचाया जा रहा है।
दूसरी ओर समाजवादी पार्टी का दावा है कि पिछला चुनाव वह कम अंतर से हारी थी और 2024 लोकसभा चुनाव के बाद भाजपा की बढ़त और कम हुई है। पार्टी नेताओं का कहना है कि पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समीकरण के आधार पर संगठन को बूथ स्तर तक मजबूत किया जा रहा है और 2027 में सपा इस सीट पर जीत दर्ज करेगी।
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार गरौठा सीट का चुनावी गणित जातीय समीकरणों पर काफी हद तक निर्भर करता है। क्षेत्र में दलित, यादव, ठाकुर, ब्राह्मण, पटेल, कुशवाहा और मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं। यदि सपा यादव-दलित-मुस्लिम वोटों का मजबूत गठजोड़ बनाने में सफल रहती है तो मुकाबला कड़ा हो सकता है। वहीं भाजपा को गैर-यादव ओबीसी और परंपरागत समर्थक वर्गों का लाभ मिलने की संभावना रहती है।
स्थानीय पत्रकारों का मानना है कि वर्तमान समय में भाजपा की स्थिति मजबूत दिखाई देती है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की लोकप्रियता पार्टी के लिए बड़ा सहारा है। हालांकि वे यह भी मानते हैं कि यदि समाजवादी पार्टी सही सामाजिक समीकरण और मजबूत प्रत्याशी के साथ मैदान में उतरती है तो 2027 का चुनाव बेहद दिलचस्प और कांटे की टक्कर वाला हो सकता है।
फिलहाल गरौठा विधानसभा में सियासी माहौल गर्म होने लगा है और दोनों प्रमुख दल अपनी-अपनी रणनीति को धार देने में जुट गए हैं।










