सभी वीथिकों को डिजिटल स्वरूप दिया जाएगा। इसकी मदद से यहां आने वाले पर्यटकों को स्क्रीन टच करते हुए सारी जानकारी उपलब्ध हो जाएगी।
किले की तलहटी पर बना राजकीय संग्रहालय जल्द ही नए कलेवर में नजर आएगा। संग्रहालय को दिल्ली म्यूजियम की तर्ज पर आधुनिक स्वरूप दिया जाएगा। इसके तहत संग्रहालय की वीथिकाओं का भी नवीनीकरण होगा। यह वीथिकाएं स्मार्ट बनाई जाएंगी, जिससे कोई भी पर्यटक तकनीकी की बदौलत यहां संग्रहित वस्तुओं के ऐतिहासिक महत्व से परिचित हो सकेगा। इस पर कुल करीब 24.40 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह काम इस महीने के अंतिम सप्ताह से आरंभ हो जाने की उम्मीद है।राजकीय संग्रहालय में रानी लक्ष्मीबाई समेत बुंदेलखंड के समृद्ध इतिहास, दुर्लभ मूर्तियों समेत हजारों पुरातात्विक महत्व से जुड़ी धरोहरें सहेजी गई हैं। दूर-दराज से आने वाले पर्यटक इस नाते संग्रहालय जरूर आते हैं लेकिन, पिछले करीब एक दशक से संग्रहालय में सुधार संबंधी कोई कार्य नहीं कराए गए। इस वजह से संग्रहालय धीरे-धीरे दुर्दशा का शिकार होता गया। इन सब परिस्थितियों को देखते हुए इसे अब आधुनिक स्वरूप देने की तैयारी है।
निदेशक डा. मनोज कुमार का कहना है कि प्रोजेक्ट में संग्रहालय भवन के व्यापक नवीनीकरण, सुदृढ़ीकरण और इंटीरियर विकास का कार्य शामिल है। संग्रहालय को आधुनिक सुविधाओं से लैस किया जाएगा, जिससे वह आधुनिक संग्रहालयों की तर्ज पर विकसित हो सके। पर्यटक समेत विद्यार्थियों व शोधार्थियों को भी इसका फायदा हो सके। उन्होंने बताया कि सभी वीथिकों को डिजिटल स्वरूप दिया जाएगा। इसकी मदद से यहां आने वाले पर्यटकों को स्क्रीन टच करते हुए सारी जानकारी उपलब्ध हो जाएगी। भीतरी इंटीरियर को आधुनिक बनाया जाएगा। अत्याधुनिक एचवीएसी (केंद्रीकृत वातानुकूलन) प्रणाली, फायर फाइटिंग सिस्टम, नई विद्युत व्यवस्था की जाएगी। पार्क में लैंडस्केपिंग का भी कार्य कराया जाएगा। निदेशक डा.मनोज कुमार के मुताबिक टेंडर प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है। अब जल्द ही यहां कार्य आरंभ होगा।