जिला बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन चुनाव में फिर झोल! एक सप्ताह में दूसरी बार बढ़ी चुनाव की तारीख, कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद बनी प्रबंध समिति पर उठे सवाल 20 सितंबर के मतदान में पर्ची को लेकर हंगामा, 23 सितंबर का चुनाव अब अनिश्चितकाल के लिए टला निर्विरोध निर्वाचन के बीच बदले समीकरण से बढ़ा विवाद, दोनों पक्ष आमने-सामने
झांसी। जिला बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन, कानपुर रोड, झांसी का चुनाव विवादों में घिर गया है। 20 सितंबर को हुए चुनाव के दौरान कुछ समय मतदान होने के बाद अधिकृत प्रत्याशी के स्थान पर दूसरे नाम की पर्ची सामने आने को लेकर हंगामा हो गया। भारी विरोध के बाद 23 सितंबर को दोबारा चुनाव कराने की तारीख घोषित की गई, लेकिन अब 23 सितंबर को प्रस्तावित चुनाव को सहायक रजिस्ट्रार, सोसायटीज एवं चिट्स ने अपरिहार्य कारण बताते हुए अनिश्चितकाल के लिए आगे बढ़ा दिया है। इससे चुनाव मैदान में उतरे प्रत्याशियों की तैयारियां धरी की धरी रह गईं।
एसोसिएशन से जुड़े कुछ बस ऑपरेटरों का कहना है कि चुनाव निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराया जाना चाहिए। इसके साथ ही कार्यकाल समाप्त होने के बावजूद बनी प्रबंध समिति के कार्यकाल और उसके लेखा-जोखा को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उनका कहना है कि पहले इन बिंदुओं को स्पष्ट किया जाना जरूरी है।
वहीं दूसरे पक्ष का कहना है कि 23 सितंबर को इतनी जल्दी दोबारा चुनाव कराने से कई सदस्य मतदान से वंचित रह सकते हैं। इसके अलावा चुनाव प्रक्रिया से जुड़ी अन्य कथित विसंगतियों को लेकर भी सवाल उठाए गए। इन्हीं विवादों के बीच चुनाव को आनन-फानन में कराने के पीछे के उद्देश्य पर भी सवाल खड़े किए जा रहे हैं।
प्रशासनिक हस्तक्षेप के बाद विभाग सक्रिय
चुनाव को लेकर लगातार उठ रहे सवालों के बीच उच्च प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा संबंधित अधिकारियों को चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी तरीके से सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए जाने की बात सामने आई। इसके बाद सोसायटीज एवं चिट्स विभाग सक्रिय हुआ और 23 सितंबर को होने वाली चुनाव प्रक्रिया को अपरिहार्य कारणों का हवाला देते हुए अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दिया गया।
निर्विरोध निर्वाचन के बीच बदले समीकरण
चुनाव से जुड़े सूत्रों के अनुसार अध्यक्ष समेत कुछ पदों पर निर्विरोध निर्वाचन को लेकर सहमति बनने की स्थिति थी। इसी बीच कोषाध्यक्ष पद को लेकर भी समीकरण बदलने की चर्चा सामने आई। आरोप है कि निर्विरोध निर्वाचन की स्थिति बनने के बाद अध्यक्ष अनूप यादव ने अपने पुराने पारिवारिक कारोबारी साझेदार को मैदान में उतार दिया।
इसके बाद निर्विरोध कोषाध्यक्ष बनने की स्थिति में बताए जा रहे जितेंद्र सिंह के नाम को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया। मतदान के दौरान पर्ची से नाम गायब होने की बात सामने आने के बाद पहले से चल रहे सवाल और गहरे हो गए। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
दोनों पक्ष पीछे हटने को तैयार नहीं
फिलहाल चुनाव को लेकर एसोसिएशन के दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम बताए जा रहे हैं। कुछ बस ऑपरेटरों का कहना है कि आपसी सामंजस्य से चुनाव प्रक्रिया आगे बढ़ रही थी, लेकिन बाद में नए समीकरण बनने से प्रक्रिया बाधित हो गई। इससे आपसी मतभेद और गहरे होने की आशंका जताई जा रही है।
बस ऑपरेटरों का कहना है कि विवाद को व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का प्रश्न बनाने के बजाय निष्पक्ष चुनाव, सदस्यों के मतदान के अधिकार और एसोसिएशन के हित को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। यदि समय रहते सभी पक्ष पारदर्शी प्रक्रिया और आपसी सहमति की राह पर लौटते हैं तो एसोसिएशन को नई गति, ऊर्जा और दिशा दी जा सकती है।
रिपोर्ट: नवीन यादव










