आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के फर्जी दावों पर रेलवे बोर्ड का शिकंजा रेलवे बोर्ड के उपनिदेशक बृजेश कुमार ने जारी किया पत्र, नियुक्ति के समय प्रमाणपत्रों का होगा समयबद्ध सत्यापन; गलत दावा मिलने पर कार्रवाई

नई दिल्ली। आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (ईडब्ल्यूएस) के आरक्षण को लेकर रेलवे बोर्ड ने सख्ती दिखाई है। रेलवे बोर्ड के उपनिदेशक/ई(एससीटी)-I बृजेश कुमार ने 22 सितंबर 2026 को पत्र जारी कर सभी जोनल रेलवे, उत्पादन इकाइयों, रेलवे के अधीन सार्वजनिक उपक्रमों और स्वायत्त निकायों को ईडब्ल्यूएस आरक्षण से संबंधित पहले जारी निर्देशों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने को कहा है।

बोर्ड ने 7 फरवरी 2019 को जारी अपने पत्र और आरबीई संख्या 21/2019 में दिए निर्देशों का हवाला देते हुए इन्हें दोबारा सभी संबंधित संस्थानों की जानकारी और सख्त अनुपालन के लिए जारी किया है।

नियुक्ति के समय प्रमाणपत्रों की होगी जांच

पत्र में कर्मचारियों के ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्रों के नियुक्ति के समय समयबद्ध सत्यापन पर विशेष जोर दिया गया है। रेलवे बोर्ड का निर्देश है कि प्रमाणपत्रों की जांच निर्धारित प्रक्रिया के तहत की जाए, ताकि आरक्षण का लाभ पात्र अभ्यर्थियों को ही मिल सके।

गलत या फर्जी दावा मिला तो कार्रवाई

रेलवे बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यदि किसी व्यक्ति का ईडब्ल्यूएस दावा गलत या फर्जी पाया जाता है तो उसके विरुद्ध उचित कार्रवाई की जा सकती है। संबंधित अधिकारियों को प्रमाणपत्रों के सत्यापन की प्रक्रिया को गंभीरता से लेने और नियमों का पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।

जोनल रेलवे से लेकर सार्वजनिक उपक्रमों तक निर्देश

रेलवे बोर्ड का पत्र सभी भारतीय रेलवे के महाप्रबंधक (कार्मिक), उत्पादन इकाइयों, आरडीएसओ लखनऊ तथा रेल मंत्रालय के नियंत्रण वाली सार्वजनिक क्षेत्र की इकाइयों और स्वायत्त निकायों के सीएमडी/एमडी को भेजा गया है।

पत्र में 31 जनवरी 2019 को कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग की ओर से जारी कार्यालय ज्ञापन का भी उल्लेख किया गया है। रेलवे बोर्ड ने पूर्व में जारी दिशा-निर्देशों को दोहराते हुए उनके सख्ती से अनुपालन और ईडब्ल्यूएस प्रमाणपत्रों के समयबद्ध सत्यापन पर जोर दिया है।

रिपोर्ट: नवीन यादव

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