झांसी रेलवे स्टेशन से खुलेगा बुंदेलखंड के पर्यटन का रास्ता! विश्व पर्यटन दिवस पर VGLJ बना पर्यटकों का पहला पड़ाव, प्लेटफॉर्म-1 पर यूपी और एमपी पर्यटन विभाग के हेल्प डेस्क
झांसी। 27 सितंबर—विश्व पर्यटन दिवस पर वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी रेलवे स्टेशन (VGLJ) सिर्फ यात्रियों की आवाजाही का केंद्र नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत से पर्यटकों को जोड़ने वाला महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार नजर आया। स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर-1 पर उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश पर्यटन विभागों के हेल्प डेस्क एवं स्टॉल यात्रियों और पर्यटकों को दोनों राज्यों के प्रमुख पर्यटन स्थलों की जानकारी और मार्गदर्शन उपलब्ध करा रहे हैं।
झांसी को बुंदेलखंड का मुख्य प्रवेश द्वार माना जाता है। देश के अलग-अलग हिस्सों से ट्रेन के जरिए यहां पहुंचने वाले पर्यटकों के लिए स्टेशन पर उपलब्ध पर्यटन संबंधी जानकारी काफी महत्वपूर्ण साबित होती है। हेल्प डेस्क के माध्यम से पर्यटकों को झांसी किला, रानी महल, ओरछा, खजुराहो समेत बुंदेलखंड के प्रमुख ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों के बारे में जानकारी दी जाती है।
स्टेशन से विरासत स्थलों तक सीधा मार्गदर्शन
पर्यटकों के सामने सबसे बड़ी चुनौती अक्सर यह होती है कि झांसी पहुंचने के बाद आसपास के प्रमुख पर्यटन स्थलों तक कैसे पहुंचा जाए और किन स्थानों को यात्रा में शामिल किया जाए। प्लेटफॉर्म-1 पर मौजूद पर्यटन विभागों के काउंटर इसी जरूरत को पूरा करने में मददगार हैं। यहां यात्रियों को पर्यटन स्थलों से संबंधित आवश्यक जानकारी और यात्रा संबंधी मार्गदर्शन उपलब्ध कराया जाता है।
दो राज्यों की पर्यटन विरासत से जुड़ता झांसी
झांसी की भौगोलिक स्थिति इसे उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की पर्यटन विरासत के बीच महत्वपूर्ण कड़ी बनाती है। एक ओर वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई और झांसी का गौरवशाली इतिहास, तो दूसरी ओर ओरछा और खजुराहो जैसी ऐतिहासिक धरोहरें पर्यटकों को आकर्षित करती हैं। रेलवे स्टेशन पर स्थापित दोनों राज्यों के पर्यटन विभागों के हेल्प डेस्क इस पूरे पर्यटन क्षेत्र की जानकारी यात्रियों तक पहुंचाने का माध्यम बने हुए हैं।
विश्व पर्यटन दिवस पर VGLJ से दिया गया संदेश साफ है—झांसी केवल रेल यात्रियों का ठहराव नहीं, बल्कि बुंदेलखंड की ऐतिहासिक विरासत और पर्यटन की दुनिया में प्रवेश का प्रमुख द्वार है।
रिपोर्ट: नवीन यादव
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