सादगी की मिसाल: प्रधानमंत्री होकर भी खरीदी पत्नी के लिए सबसे सस्ती साड़ी महंगी साड़ियां सामने रखे जाने पर बोले शास्त्री—“मेरे बजट के मुताबिक सबसे सस्ती दिखाइए”
झांसी देश के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री अपनी सादगी, ईमानदारी और सिद्धांतों के लिए आज भी याद किए जाते हैं। उनके जीवन से जुड़ा एक प्रचलित प्रसंग बताता है कि प्रधानमंत्री जैसे सर्वोच्च पद पर पहुंचने के बाद भी उन्होंने निजी जीवन में सादगी और आत्मसंयम को नहीं छोड़ा।
कहा जाता है कि उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर में एक कपड़ा मिल के दौरे के दौरान मिल मालिक ने शास्त्री जी के सामने कई महंगी और आकर्षक साड़ियां रखीं। उम्मीद थी कि वे अपनी पत्नी ललिता शास्त्री के लिए इनमें से कुछ साड़ियां पसंद करेंगे।
शास्त्री जी ने जब साड़ियों की कीमत पूछी तो उन्हें बताया गया कि उनकी कीमत उस समय के हिसाब से काफी अधिक थी। उन्होंने महंगी साड़ियां लेने से इनकार कर दिया और अपने बजट के अनुरूप कम कीमत वाली साड़ी दिखाने को कहा।
उपहार की पेशकश भी ठुकरा दी
इस प्रचलित प्रसंग के अनुसार, मिल मालिक ने साड़ियां प्रधानमंत्री को उपहार में देने की पेशकश की। शास्त्री जी ने इसे स्वीकार करने से भी इनकार कर दिया। उनका सिद्धांत था कि निजी उपयोग की वस्तु वही होनी चाहिए, जिसकी कीमत वह अपने वेतन से चुका सकें।
इसके बाद उन्होंने साधारण और कम कीमत वाली साड़ियां ही खरीदीं। प्रसंग का यही हिस्सा उनकी सादगी और सार्वजनिक जीवन में निजी लाभ से दूरी की भावना को रेखांकित करता है।
वेतन से खरीदी साड़ी, पद का नहीं लिया निजी लाभ
लाल बहादुर शास्त्री का जीवन इस बात की मिसाल माना जाता है कि पद की ऊंचाई के साथ व्यक्ति की निजी जरूरतें और जीवनशैली जरूरी नहीं कि उतनी ही भव्य हो जाएं। उनके लिए सार्वजनिक पद जिम्मेदारी का विषय था, निजी सुविधा का नहीं।
यही सादगी, ईमानदारी और सिद्धांतप्रियता शास्त्री जी के व्यक्तित्व की पहचान बनी। उनके जीवन से जुड़े ऐसे प्रसंग आज भी लोगों को यह संदेश देते हैं कि सार्वजनिक जीवन में पद से अधिक महत्वपूर्ण व्यक्ति के सिद्धांत और आचरण होते हैं।










