बाबा काली नाथ की चेतावनी का असर! आज भी मुरथल के ढाबों में नहीं बनता नॉनवेज, वजह चौंका देगी

दिल्ली-चंडीगढ़ हाईवे पर बसे मुरथल के ढाबे पराठों के लिए मशहूर हैं, दूर-दूर से लोग यहां पराठे खाने आते हैं. भले ही आजकल नॉनवेज खाने का चलन जोरों पर है लेकिन इस जगह पर कहीं भी नॉनवेज नहीं मिलता है. इसके पीछे वजह एक संत की चेतावनी है.

इसके पीछे एक दिलचस्प और रहस्यमयी कहानी जुड़ी है, जो बाबा काली नाथ से संबंधित है। मान्यता है कि कई साल पहले बाबा काली नाथ इस इलाके में तपस्या करते थे। उन्होंने यहां के लोगों को सख्त चेतावनी दी थी कि इस भूमि पर मांसाहार नहीं बनाया जाएगा। कहा जाता है कि बाबा की बात को अनदेखा करने वालों को नुकसान उठाना पड़ा, जिसके बाद ढाबा मालिकों ने इसे नियम की तरह मान लिया।

Murthal Dhaba - Reviews, Photos & Phone Number - Updated September 2025 - Food Courts in Sonipat, Sonipat (HR) - Wheree

स्थानीय लोगों के अनुसार, कुछ ढाबा संचालकों ने समय-समय पर नॉनवेज शुरू करने की कोशिश की, लेकिन उन्हें अजीब घटनाओं और घाटे का सामना करना पड़ा। इसके बाद धीरे-धीरे यह धारणा और मजबूत होती गई कि बाबा काली नाथ की चेतावनी को नजरअंदाज करना ठीक नहीं है।

आज भी मुरथल के अधिकतर ढाबों में शुद्ध शाकाहारी खाना ही परोसा जाता है, खासकर आलू, पनीर और गोभी के पराठे, जिनका स्वाद देशभर में मशहूर है। यही वजह है कि मुरथल एक तरह से “वेज फूड पैराडाइज” बन चुका है, जहां लोग खास तौर पर देसी घी से बने पराठों का आनंद लेने पहुंचते हैं।

हालांकि इस कहानी के पीछे कोई आधिकारिक प्रमाण नहीं है, लेकिन आस्था और परंपरा का असर इतना गहरा है कि आज भी ढाबा मालिक इस नियम का पालन करते हैं। यही रहस्य और मान्यता मुरथल को बाकी फूड डेस्टिनेशनों से अलग बनाती है।

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