अयोध्या में अब नियमित होने लगी रामकोट की परिक्रमा, साधु-संतों के साथ ही जुटने लगे श्रद्धालु
अयोध्या में रामकोट परिक्रमा अब नियमित रूप से प्रतिदिन भोर में आयोजित की जा रही है, जिसमें साधु-संतों और हजारों श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या में भागीदारी हो रही है।
धार्मिक नगरी अयोध्या में इन दिनों आस्था का अनोखा दृश्य देखने को मिल रहा है। यहां रामकोट परिक्रमा अब नियमित रूप से प्रतिदिन भोर में आयोजित की जा रही है, जिसमें साधु-संतों के साथ-साथ हजारों श्रद्धालु बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं। जैसे ही सूरज की पहली किरणें आसमान में फैलती हैं, पूरा रामकोट क्षेत्र “जय श्रीराम” के जयघोष से गूंज उठता है।
यह परिक्रमा विशेष रूप से राम जन्मभूमि क्षेत्र के आसपास की जाती है, जिसे अत्यंत पवित्र माना जाता है। श्रद्धालु सुबह तड़के उठकर स्नान-ध्यान के बाद परिक्रमा मार्ग पर निकल पड़ते हैं। माना जाता है कि इस समय की गई परिक्रमा से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन में सुख-शांति आती है।
स्थानीय प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट द्वारा भी इस आयोजन को सुव्यवस्थित करने के लिए विशेष इंतजाम किए गए हैं। सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम, साफ-सफाई और श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभिन्न स्थानों पर सहायता केंद्र बनाए गए हैं। इससे दूर-दराज से आने वाले भक्तों को किसी प्रकार की परेशानी का सामना नहीं करना पड़ता।
साधु-संतों का कहना है कि रामकोट परिक्रमा की यह परंपरा प्राचीन समय से चली आ रही है, लेकिन अब इसे नियमित और व्यवस्थित रूप दिया गया है। इससे न केवल धार्मिक भावना को बल मिल रहा है, बल्कि अयोध्या में आध्यात्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा मिल रहा है।
श्रद्धालुओं के लिए यह अनुभव अत्यंत भावुक और श्रद्धा से भरा होता है। कई लोग इसे अपनी जीवन की सबसे महत्वपूर्ण धार्मिक यात्रा मानते हैं। खासकर सुबह के शांत वातावरण में भक्ति और विश्वास का यह संगम लोगों को आंतरिक शांति का अनुभव कराता है।
कुल मिलाकर, अयोध्या में शुरू हुई यह दैनिक रामकोट परिक्रमा आस्था, परंपरा और व्यवस्था का सुंदर संगम बन गई है। आने वाले समय में इससे और अधिक श्रद्धालुओं के जुड़ने की संभावना है, जिससे यह धार्मिक आयोजन और भी भव्य रूप ले सकता है।










