मां बनने के बाद पोस्टपार्टम को याद कर इमोशनल हुईं Rubina Dilaik, बोलीं- ‘मुझे खुद से नफरत…’

रुबीना दिलैक ने जुड़वा बेटियों की मां बनने के बाद अपने पोस्टपार्टम डिप्रेशन के मुश्किल दौर को साझा किया। उन्होंने बताया कि इस दौरान वह बेहद उदास रहती थीं और खुद को नापसंद करने लगी थीं, जिसमें अभिनव शुक्ला ने उनका पूरा साथ दिया।

टेलीविजन एक्ट्रेस रुबीना दिलैक (Rubina Dilaik) साल 2023 में मां बनी थीं। एक्ट्रेस ने दो जुड़वा बेटियों को जन्म दिया जिनका नाम उन्होंने जीवा और एधा रखा। रुबीना दिलैक ने अभिनव शुक्ला से 21 जून 2018 को शिमला में शादी की थी।

अब अभिनेत्री रोहित शेट्टी के रियलिटी शो खतरों के खिलाड़ी 15 में एक बार फिर हिस्सा लेने जा रही हैं। एक्ट्रेस ने मां बनने के बाद अपने जीवन में आए मुश्किल दौर के बारे में खुलकर बात की।

बेहद उदास रहने लगी थीं रुबीना, अचानक बदला व्यवहार तो परिवार भी हुआ परेशान

टीवी इंडस्ट्री की मशहूर अभिनेत्री Rubina Dilaik ने हाल ही में अपने मुश्किल दौर को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि एक समय ऐसा था जब वह लगातार उदास रहने लगी थीं और मानसिक रूप से काफी परेशान महसूस कर रही थीं। उनके व्यवहार में आए बदलाव को देखकर परिवार और करीबी लोग भी चिंता में पड़ गए थे।

रुबीना ने कहा कि काम का दबाव, लगातार व्यस्त दिनचर्या और निजी जिंदगी की चुनौतियों ने उनके मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाला। धीरे-धीरे उन्होंने लोगों से दूरी बनानी शुरू कर दी थी। पहले जहां वह हमेशा खुश और एक्टिव रहती थीं, वहीं उस दौर में वह चुप-चुप रहने लगी थीं। छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आना और अकेले रहने का मन करना उनके स्वभाव का हिस्सा बनता जा रहा था।

अभिनेत्री ने बताया कि शुरुआत में उन्हें खुद भी समझ नहीं आया कि आखिर उनके साथ क्या हो रहा है। लेकिन जब परिवार ने उनके व्यवहार में लगातार बदलाव देखा, तब सभी ने उन्हें भावनात्मक सहारा दिया। रुबीना के अनुसार, मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज करना सही नहीं है और समय रहते मदद लेना बेहद जरूरी होता है।

उन्होंने यह भी कहा कि मुश्किल समय में परिवार और दोस्तों का साथ बहुत मायने रखता है। धीरे-धीरे उन्होंने खुद को संभालने के लिए योग, मेडिटेशन और पॉजिटिव लाइफस्टाइल की मदद ली। इसके बाद उनकी स्थिति में सुधार आने लगा।

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  • रुबीना की यह बात कई लोगों को प्रेरित कर रही है, क्योंकि आज के समय में तनाव और मानसिक दबाव आम समस्या बन चुकी है। उनका मानना है कि मानसिक स्वास्थ्य पर खुलकर बात करने से लोगों में जागरूकता बढ़ती है और जरूरतमंद लोगों को मदद लेने की हिम्मत मिलती है।

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