Malmas 2026: 17 मई से 15 जून तक… एक महीने रहेगा मलमास का पहरा, नहीं होंगे मांगलिक कार्य

हिंदू पंचांग के अनुसार 17 मई 2026 से 15 जून 2026 तक मलमास यानी अधिक मास का विशेष संयोग बन रहा है। इस एक महीने की अवधि को धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। मलमास लगते ही विवाह, गृह प्रवेश, मुंडन, सगाई, नए व्यापार की शुरुआत और अन्य मांगलिक कार्यों पर विराम लग जाता है। मान्यता है कि इस दौरान शुभ कार्य करने से अपेक्षित फल नहीं मिलता, इसलिए लोग इस समय को पूजा-पाठ, दान-पुण्य और आध्यात्मिक साधना के लिए समर्पित करते हैं।

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क्या होता है मलमास?

हिंदू कैलेंडर चंद्र और सौर गणना पर आधारित होता है। चंद्र वर्ष लगभग 354 दिनों का होता है, जबकि सौर वर्ष 365 दिनों का। दोनों के बीच करीब 11 दिनों का अंतर आता है। यही अंतर हर तीन वर्ष में लगभग एक महीने के बराबर हो जाता है। इस अंतर को संतुलित करने के लिए हिंदू पंचांग में एक अतिरिक्त माह जोड़ा जाता है, जिसे अधिक मास या मलमास कहा जाता है।

धार्मिक ग्रंथों में इसे “पुरुषोत्तम मास” भी कहा गया है, क्योंकि यह माह भगवान विष्णु को समर्पित माना जाता है। मान्यता है कि इस महीने में भगवान विष्णु की पूजा करने से विशेष पुण्य की प्राप्ति होती है और जीवन के कष्ट दूर होते हैं।

क्यों नहीं होते मांगलिक कार्य?

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार मलमास में ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति शुभ कार्यों के लिए अनुकूल नहीं मानी जाती। यही कारण है कि इस अवधि में विवाह, गृह प्रवेश, यज्ञोपवीत, नामकरण संस्कार और नए कार्यों की शुरुआत टाल दी जाती है।

हालांकि इस दौरान धार्मिक गतिविधियों का महत्व कई गुना बढ़ जाता है। लोग कथा-कीर्तन, भागवत पाठ, गीता पाठ, हवन और दान-पुण्य जैसे कार्य करते हैं। कई श्रद्धालु पूरे महीने व्रत रखकर भगवान विष्णु की आराधना भी करते हैं।

मलमास में क्या करें?

मलमास को आत्मशुद्धि और आध्यात्मिक उन्नति का समय माना जाता है। इस दौरान सुबह स्नान कर भगवान विष्णु की पूजा करना शुभ माना गया है। तुलसी पूजा, विष्णु सहस्रनाम का पाठ और गीता का अध्ययन विशेष फलदायी माना जाता है।

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गरीबों को भोजन कराना, वस्त्र दान करना और जरूरतमंदों की सहायता करना भी इस महीने में अत्यंत पुण्यदायी माना गया है। धार्मिक मान्यता है कि अधिक मास में किया गया दान कई गुना फल देता है।

किन कार्यों की होती है अनुमति?

मलमास में शुभ संस्कारों पर रोक जरूर रहती है, लेकिन दैनिक जीवन के सामान्य कार्य किए जा सकते हैं। नौकरी ज्वाइन करना, शिक्षा ग्रहण करना, यात्रा करना या जरूरी खरीदारी करना वर्जित नहीं माना गया है। यदि कोई कार्य अत्यंत आवश्यक हो तो विद्वान पंडित से परामर्श लेकर किया जा सकता है।

धार्मिक दृष्टि से विशेष महत्व

पुराणों के अनुसार अधिक मास को पहले कोई देवता स्वीकार नहीं कर रहे थे। तब भगवान विष्णु ने इसे अपना नाम “पुरुषोत्तम मास” दिया और कहा कि जो व्यक्ति इस महीने में भक्ति और दान करेगा, उसे विशेष आशीर्वाद मिलेगा। तभी से यह महीना भगवान विष्णु की उपासना के लिए समर्पित माना जाता है।

मलमास लोगों को भौतिक जीवन से थोड़ा विराम लेकर आत्मचिंतन और आध्यात्मिकता की ओर बढ़ने का संदेश देता है। यही कारण है कि इस अवधि में मंदिरों में भजन-कीर्तन, सत्संग और धार्मिक आयोजनों की रौनक बढ़ जाती है।

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