रामलला के भोग का 28 मई को सुरक्षा ऑडिट करेगी FSSAI टीम, रसोइयों व कोठारियों का कराया जाएगा स्वास्थ्य परीक्षण

अयोध्या के राम मंदिर में रामलला को अर्पित होने वाले भोग को अब जल्द ही शुद्धता का प्रमाण पत्र मिलेगा। FSSAI की केंद्रीय टीम 28 मई को सीता रसोई का अंतिम सुरक्षा ऑडिट करेगी, जिसके बाद ‘भोग’ प्रमाण पत्र जारी होगा।

राम मंदिर में विराजमान रामलला को अर्पित किए जाने वाले भोग को भी अब शीघ्र ही शुद्धता का प्रमाणपत्र मिल जाएगा। मंगलवार को श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपतराय के साथ हुई बैठक में खाद्य सुरक्षा विभाग व एफएसएसएआइ के अधिकारियों ने विभिन्न मानकों व प्रक्रिया पर चर्चा की, इसके बाद ट्रस्ट की ओर से एफएसएसएआइ (भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण) के लाइसेंस के लिए आवेदन किया गया।

यह पहल श्रद्धालुओं की आस्था और स्वास्थ्य दोनों को ध्यान में रखते हुए की जा रही है। देश-विदेश से हर दिन हजारों श्रद्धालु अयोध्या पहुंचते हैं और भगवान राम को चढ़ाए जाने वाले प्रसाद को अत्यंत पवित्र मानते हैं। ऐसे में यह सुनिश्चित करना जरूरी हो गया था कि भोग पूरी तरह स्वच्छ, सुरक्षित और खाद्य मानकों के अनुरूप तैयार किया जाए। FSSAI की टीम पिछले कई महीनों से सीता रसोई में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, पानी की गुणवत्ता, सफाई व्यवस्था, रसोई संचालन और कर्मचारियों की स्वास्थ्य सुरक्षा की जांच कर रही है।

मंदिर प्रशासन के अनुसार सीता रसोई में बनने वाले सभी भोग को पारंपरिक विधि और धार्मिक मर्यादाओं के अनुसार तैयार किया जाता है। यहां शुद्ध देसी घी, उच्च गुणवत्ता वाले अनाज, दूध, मेवा और अन्य सामग्री का उपयोग होता है। रसोई में आधुनिक तकनीक के साथ-साथ पारंपरिक भारतीय रसोई व्यवस्था का भी विशेष ध्यान रखा गया है। सफाई के लिए विशेष मानक अपनाए गए हैं ताकि किसी भी प्रकार की अशुद्धि की संभावना न रहे।

28 मई को होने वाला अंतिम ऑडिट बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। FSSAI की केंद्रीय टीम रसोई के हर पहलू की गहन जांच करेगी। इसमें खाद्य सामग्री के भंडारण, पकाने की प्रक्रिया, तापमान नियंत्रण, कर्मचारियों की स्वच्छता और प्रसाद वितरण व्यवस्था का निरीक्षण शामिल होगा। यदि सभी मानक संतोषजनक पाए गए तो रामलला के भोग को आधिकारिक “भोग प्रमाण पत्र” प्रदान कर दिया जाएगा।

धार्मिक विशेषज्ञों और श्रद्धालुओं ने इस पहल का स्वागत किया है। उनका कहना है कि इससे मंदिर में मिलने वाले प्रसाद की विश्वसनीयता और बढ़ेगी। साथ ही देश के अन्य बड़े मंदिरों के लिए भी यह एक उदाहरण बनेगा कि धार्मिक स्थलों पर भोजन और प्रसाद की गुणवत्ता सुनिश्चित करना कितना आवश्यक है।

मंदिर प्रशासन का मानना है कि यह प्रमाण पत्र केवल एक औपचारिकता नहीं बल्कि श्रद्धालुओं के विश्वास को और मजबूत करने का माध्यम है। आने वाले समय में अयोध्या का राम मंदिर न केवल आध्यात्मिक केंद्र बनेगा बल्कि स्वच्छता, व्यवस्था और आधुनिक प्रबंधन का भी आदर्श प्रस्तुत करेगा। रामलला के भोग को मिलने वाला यह प्रमाण पत्र धार्मिक आस्था और खाद्य सुरक्षा के संगम का एक अनूठा उदाहरण माना जा रहा है।

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