जम्मू-कश्मीर पूर्ण राज्य होता तो महामाया वन क्षेत्र में एक भी घर नहीं गिरता, डिप्टी सीएम बोले-
उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने कहा कि अगर जम्मू-कश्मीर पूर्ण राज्य होता तो महामाया वन क्षेत्र में अवैध निर्माण नहीं गिराए जाते। उन्होंने नौकरशाही पर फैसले लेने का आरोप लगाया और हंदवाड़ा में विकास कार्यों की समीक्षा भी की।
सुरिंदर चौधरी ने जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य के दर्जे को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अगर जम्मू-कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा प्राप्त होता, तो महामाया वन क्षेत्र में अवैध निर्माणों को इस तरह नहीं गिराया जाता। उनके इस बयान के बाद प्रदेश की राजनीति में नई बहस शुरू हो गई है।
उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने नौकरशाही पर भी गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि वर्तमान व्यवस्था में कई महत्वपूर्ण फैसले प्रशासनिक अधिकारी ले रहे हैं, जबकि जनता द्वारा चुनी गई सरकार की भूमिका सीमित होती जा रही है। उनका कहना था कि यदि जम्मू-कश्मीर को फिर से पूर्ण राज्य का दर्जा मिल जाए, तो जनता के हितों को ध्यान में रखते हुए फैसले लिए जा सकेंगे और स्थानीय लोगों की समस्याओं का बेहतर समाधान होगा।
महामाया वन क्षेत्र में हाल ही में प्रशासन द्वारा अवैध निर्माणों के खिलाफ कार्रवाई की गई थी। बुलडोजर चलाकर कई ढांचों को हटाया गया, जिसके बाद स्थानीय लोगों और राजनीतिक दलों में नाराजगी देखने को मिली। इसी मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए सुरिंदर चौधरी ने कहा कि ऐसी कार्रवाई में मानवीय पहलुओं और स्थानीय परिस्थितियों का ध्यान रखा जाना चाहिए था। उन्होंने संकेत दिए कि निर्वाचित सरकार को अधिक अधिकार मिलने पर ऐसे फैसलों में संतुलन बनाया जा सकता था।
अपने दौरे के दौरान उपमुख्यमंत्री ने हंदवाड़ा में विकास कार्यों की समीक्षा भी की। उन्होंने अधिकारियों के साथ बैठक कर सड़क, बिजली, पानी और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े प्रोजेक्ट्स की जानकारी ली। उन्होंने कहा कि सरकार ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में विकास कार्यों को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए प्रतिबद्ध है।
सुरिंदर चौधरी ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनता से जुड़े कार्यों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने कहा कि लोगों को मूलभूत सुविधाएं समय पर मिलनी चाहिए और विकास योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचना जरूरी है।
उनके बयान को राजनीतिक रूप से काफी अहम माना जा रहा है, क्योंकि जम्मू-कश्मीर में पूर्ण राज्य के दर्जे की मांग लंबे समय से उठती रही है। कई राजनीतिक दल लगातार केंद्र सरकार से राज्य का दर्जा बहाल करने की मांग कर रहे हैं। ऐसे में उपमुख्यमंत्री का यह बयान आने वाले समय में राजनीतिक चर्चाओं को और तेज कर सकता है।
फिलहाल सुरिंदर चौधरी के बयान पर अलग-अलग राजनीतिक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। समर्थक इसे जनता की आवाज बता रहे हैं, जबकि विरोधी दल इसे राजनीतिक बयानबाजी करार दे रहे हैं। हालांकि इतना तय है कि जम्मू-कश्मीर में राज्य के अधिकारों और प्रशासनिक फैसलों को लेकर बहस एक बार फिर तेज हो गई है।










