झांसी में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद बोले -दरबार लगाने वालों को रक्षा मंत्रालय से कांट्रेक्ट मिलना चाहिए
झांसी में आयोजित एक धार्मिक कार्यक्रम के दौरान ज्योतिषपीठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने चर्चित कथावाचक और बागेश्वर धाम के पीठाधीश्वर धीरेन्द्र कृष्ण शास्त्री के संदर्भ में बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति लोगों का भूत, वर्तमान और भविष्य बताने का दावा करता है तो उसे देश का भविष्य भी बताना चाहिए। उनका यह बयान कार्यक्रम में मौजूद श्रद्धालुओं और मीडिया के बीच चर्चा का विषय बन गया।
उन्होंने कहा, “जो लोग दरबार लगाकर लोगों की समस्याओं का समाधान बताते हैं और उनका भविष्य बताते हैं, उन्हें रक्षा मंत्रालय से कांट्रेक्ट मिलना चाहिए। वे देश को पहले से बता दें कि कब और कहां खतरा आने वाला है, ताकि देश उसकी तैयारी कर सके।” शंकराचार्य के इस बयान को कई लोगों ने कटाक्ष के रूप में देखा।
कार्यक्रम के दौरान उन्होंने सनातन धर्म, धार्मिक परंपराओं और समाज में बढ़ती आस्था पर भी अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि श्रद्धा और विश्वास भारतीय संस्कृति की महत्वपूर्ण धरोहर हैं, लेकिन किसी भी दावे को विवेक और तर्क की कसौटी पर भी परखा जाना चाहिए। उन्होंने लोगों से धर्म के मूल सिद्धांतों को समझने और आध्यात्मिकता को जीवन में अपनाने का आह्वान किया।
शंकराचार्य ने अपने संबोधन में कहा कि देश वर्तमान समय में कई महत्वपूर्ण चुनौतियों का सामना कर रहा है। ऐसे में जो लोग दिव्य शक्तियों या विशेष ज्ञान के माध्यम से भविष्य बताने का दावा करते हैं, उन्हें राष्ट्रहित के मुद्दों पर भी अपनी क्षमता का उपयोग करना चाहिए। उन्होंने व्यंग्यात्मक अंदाज में कहा कि यदि किसी को भविष्य देखने की अद्भुत क्षमता प्राप्त है तो उसे देश की सुरक्षा से जुड़े विषयों पर भी सरकार की मदद करनी चाहिए।
झांसी में आयोजित यह कार्यक्रम बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति के बीच संपन्न हुआ। शंकराचार्य ने अपने संबोधन में धर्म, संस्कृति और राष्ट्रीय एकता के महत्व पर भी जोर दिया। उनके बयान के राजनीतिक और सामाजिक मायने भी निकाले जा रहे हैं, क्योंकि हाल के वर्षों में धार्मिक कथावाचकों और आध्यात्मिक गुरुओं की लोकप्रियता में काफी वृद्धि हुई है।
फिलहाल शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद का यह बयान चर्चा का केंद्र बना हुआ है और आने वाले दिनों में इस पर विभिन्न धार्मिक संगठनों तथा समाज के अन्य वर्गों की प्रतिक्रियाएं सामने आ सकती हैं।