यूपी बीएड प्रवेश परीक्षा में 90 प्रतिशत अभ्यर्थी हुए शामिल, एआई और बायोमेट्रिक से सफल हुआ एग्जाम
उत्तर प्रदेश संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा 2026 शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई, जिसमें 90 प्रतिशत अभ्यर्थी शामिल हुए। परीक्षा को नकलविहीन बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और बायोमेट्रिक तकनीक का प्रभावी उपयोग किया गया।
उत्तर प्रदेश संयुक्त बीएड प्रवेश परीक्षा-2026 रविवार को प्रदेश के 72 जनपदों के 1,011 परीक्षा केंद्रों पर दो पालियों में शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई। आयोजक बुंदेलखंड विश्वविद्यालय के दावों के मुताबिक, परीक्षा पूरी तरह शुचितापूर्ण रही।
कुल पंजीकृत 4,44,958 अभ्यर्थियों में से 4,00,506 (90 प्रतिशत) परीक्षार्थी शामिल हुए। मऊ और शामली जनपद में पहली बार एक-एक ट्रांसजेंडर अभ्यर्थी ने भी परीक्षा दी। सर्वाधिक उपस्थिति कासगंज व पीलीभीत जनपद में दर्ज की गई, जहां 90 प्रतिशत अभ्यर्थी परीक्षा में बैठे।
सबसे कम उपस्थिति गाजियाबाद, गौतमबुद्धनगर और बुंदेलखंड क्षेत्र में रही, जहां 84 प्रतिशत अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी। देर शाम परीक्षा संपन्न होने के बाद विश्वविद्यालय के प्रतिनिधि सभी जिलों से गोपनीय सामग्री लेकर झांसी मुख्यालय के लिए रवाना हो गए, जिसे सीपीएमटी भवन में सुरक्षित जमा कराया गया।
परीक्षा के सफल संचालन के लिए बुंदेलखंड विश्वविद्यालय परिसर में एक अत्याधुनिक इंटीग्रेटेड कमांड कंट्रोल सेंटर बनाया गया था। कुलपति प्रो. मुकेश पाण्डेय और कोर कमेटी के सदस्य सुबह 4:30 बजे से ही यहां मुस्तैद हो गए थे।
दोपहर बाद झांसी मंडल के मंडलायुक्त बिमल कुमार दुबे, जिलाधिकारी गौरांग राठी, एसएसपी बीबीजीटीएस मूर्ति और सीडीओ रामेश्वर सुधाकर सब्बनवाड सहित कई वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने कमांड सेंटर पहुंचकर प्रदेश भर की लाइव मानिटरिंग का जायजा लिया।
इस दौरान कुलसचिव ज्ञानेन्द्र कुमार और राज्य समन्वयक प्रो. सौरभ श्रीवास्तव सहित पूरी तकनीकी टीम लगातार निगरानी में जुटी रही।इस बार परीक्षा को पूरी तरह नकलविहीन बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) और रियल-टाइम सर्विलांस का सहारा लिया गया। परीक्षा केंद्रों पर कुल 22,000 सीसीटीवी कैमरे और 5,651 बायोमेट्रिक मशीनें लगाई गई थीं।
दोनों पालियों के दौरान एआई सिस्टम ने सुरक्षा और संदिग्ध गतिविधियों से जुड़े कुल 12,000 अलर्ट जारी किए। इन पर त्वरित कार्रवाई करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने संबंधित केंद्राध्यक्षों को करीब 2200 फोन काल कर मौके पर ही व्यवस्थाओं को दुरुस्त कराया।
गहन बायोमेट्रिक जांच से दूर हुआ फोटो का विवादसुरक्षा के लिहाज से परीक्षा कक्ष में प्रवेश से पूर्व प्रत्येक अभ्यर्थी का चेहरा, फिंगरप्रिंट और रेटिना का मिलान फेस रिकग्निशन तकनीक से किया गया। इस सघन जांच के दौरान कमांड सेंटर को कुछ ऐसे प्रकरण मिले, जिनमें अभ्यर्थी के चेहरे का मिलान फॉर्म में लगी फोटो से नहीं हो पा रहा था।
गहन पूछताछ और तकनीकी जांच के बाद यह स्पष्ट हुआ कि अधिकांश मामलों में एक ही अभ्यर्थी द्वारा दो या अधिक आवेदन भर दिए गए थे या फिर फोटो अपलोडिंग के समय तकनीकी त्रुटि हुई थी। जांच में सभी अभ्यर्थी वास्तविक पाए गए, जिसके बाद उन्हें परीक्षा में बैठने की अनुमति दी गई।










