पत्रकार नवीन यादव की कलम से: पत्रकारिता आज साहस, जिम्मेदारी और जोखिम का दूसरा नाम
आज के समय में पत्रकारिता केवल एक पेशा नहीं, बल्कि समाज के प्रति एक बड़ी जिम्मेदारी है। सच को सामने लाना, जनहित के मुद्दों को उठाना और सत्ता से लेकर समाज तक हर वर्ग से सवाल पूछना एक पत्रकार का कर्तव्य है। लेकिन इस कर्तव्य का निर्वहन करना आज पहले से कहीं अधिक कठिन और जोखिम भरा हो गया है।
जब कोई पत्रकार तथ्यों और प्रमाणों के आधार पर किसी व्यक्ति, संस्था या अधिकारी के गलत कार्यों को उजागर करता है, तो कई बार उसका सामना विरोध, दबाव, धमकियों और चरित्र हनन जैसी परिस्थितियों से होता है। कुछ लोग अपनी गलतियों पर आत्ममंथन करने के बजाय पत्रकार की नीयत पर सवाल उठाने लगते हैं। अक्सर बिना किसी प्रमाण के यह आरोप लगाया जाता है कि “रुपये मांगे थे, नहीं दिए तो खबर छाप दी।”
ऐसे आरोप केवल इसलिए लगाए जाते हैं ताकि समाचार की सच्चाई से लोगों का ध्यान भटकाया जा सके और पत्रकार की विश्वसनीयता को नुकसान पहुंचाया जा सके। जबकि एक ईमानदार पत्रकार की सबसे बड़ी पूंजी उसकी निष्पक्षता, सत्यनिष्ठा और जनता का विश्वास होता है।
पत्रकारिता का उद्देश्य किसी व्यक्ति को बदनाम करना नहीं, बल्कि समाज के सामने सत्य को रखना और जनहित की आवाज़ बनना है। लोकतंत्र का चौथा स्तंभ तभी मजबूत रहेगा, जब पत्रकार बिना किसी भय या दबाव के निष्पक्ष होकर अपनी जिम्मेदारी निभा सकेंगे।
समाज की भी जिम्मेदारी है कि वह बिना तथ्यों के लगाए गए आरोपों पर विश्वास करने के बजाय सच्चाई को परखे और ईमानदार पत्रकारों का मनोबल बढ़ाए। क्योंकि जब पत्रकार की कलम स्वतंत्र और निष्पक्ष रहती है, तभी लोकतंत्र मजबूत होता है और समाज सही दिशा में आगे बढ़ता है।
— पत्रकार नवीन यादव की कलम से










