एक टीटीई की अनकही कहानी — स्वर्गीय श्री गंगा प्रसाद यादव जी को समर्पित
रिपोर्ट नवीन यादव
रेल यात्रा केवल पटरियों पर दौड़ती हुई एक ट्रेन नहीं होती, बल्कि लाखों यात्रियों की उम्मीदों, जिम्मेदारियों और मंज़िलों को जोड़ने वाली जीवनरेखा होती है। इस यात्रा को सुरक्षित, व्यवस्थित और सुचारु बनाए रखने में जिन लोगों का सबसे महत्वपूर्ण योगदान होता है, उनमें ट्रैवलिंग टिकट एग्जामिनर (टीटीई) का नाम प्रमुख है।
स्वर्गीय श्री गंगा प्रसाद यादव जी, जिन्होंने झांसी मंडल में हेड टीटीई के पद पर वर्षों तक अपनी सेवाएं दीं और वर्ष 1992 में सेवानिवृत्त हुए, ऐसे ही कर्तव्यनिष्ठ और ईमानदार रेलकर्मी थे। उन्होंने अपने पूरे सेवाकाल में रेलवे की गरिमा, अनुशासन और यात्रियों की सेवा को अपना धर्म माना।
जब यात्री अपनी आरक्षित सीट पर आराम से बैठकर सफर का आनंद ले रहे होते हैं, तब एक टीटीई पूरी ट्रेन में लगातार चलता रहता है। वह टिकटों की जांच करता है, यात्रियों की समस्याएं सुनता है, सीटों का समायोजन करता है, नियमों का पालन सुनिश्चित कराता है और हर परिस्थिति में व्यवस्था बनाए रखने का प्रयास करता है। उसकी ड्यूटी का कोई निश्चित समय नहीं होता। दिन हो या रात, गर्मी हो या सर्दी, त्योहार हो या पारिवारिक अवसर—उसकी पहली जिम्मेदारी यात्रियों की सुरक्षित और व्यवस्थित यात्रा होती है।
टीटीई का कार्य केवल टिकट देखना नहीं है। वह रेलवे के राजस्व की रक्षा करता है, बिना टिकट यात्रा पर रोक लगाता है, यात्रियों को उचित मार्गदर्शन देता है और आवश्यकता पड़ने पर बीमार, बुजुर्ग, महिलाओं तथा बच्चों की सहायता भी करता है। कई बार उसे यात्रियों के गुस्से, अपमान और गलतफहमियों का सामना करना पड़ता है, लेकिन वह धैर्य और संयम के साथ अपना कर्तव्य निभाता रहता है।
बहुत कम लोग सोचते हैं कि उस वर्दी के पीछे भी एक इंसान है। उसके भी माता-पिता, पत्नी, बच्चे और परिवार हैं, जो उसके घर लौटने का इंतजार करते हैं। उसके भी सपने हैं, भावनाएं हैं और उसे भी सम्मान की आवश्यकता होती है। लेकिन वह अपने निजी सुख-दुख से ऊपर उठकर राष्ट्रसेवा और यात्रियों की सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।
स्वर्गीय श्री गंगा प्रसाद यादव जी ने अपने जीवन से यही संदेश दिया कि सरकारी सेवा केवल नौकरी नहीं, बल्कि समाज और राष्ट्र के प्रति उत्तरदायित्व है। उनकी ईमानदारी, कर्तव्यनिष्ठा और सेवा भावना आज भी प्रेरणा का स्रोत है। ऐसे कर्मयोगी कभी भुलाए नहीं जा सकते। उनका जीवन आने वाली पीढ़ियों के रेलकर्मियों के लिए आदर्श रहेगा।
आज आवश्यकता है कि हम प्रत्येक टीटीई और रेलकर्मी के प्रति सम्मान का भाव रखें। अगली बार जब कोई टीटीई आपसे टिकट मांगे, तो केवल टिकट ही नहीं, बल्कि मुस्कान और सम्मान भी दीजिए। क्योंकि वह आपका विरोधी नहीं, बल्कि आपकी सुरक्षित यात्रा का सच्चा प्रहरी है।
आइए संकल्प लें—
सम्मान दें, सहयोग करें और टीटीई की मेहनत को पहचान दें।
नियमों का पालन करें और अनुशासन बनाए रखें।
रेलवे संपत्ति और राजस्व की रक्षा में अपना योगदान दें।
यात्रा को सुरक्षित, सुखद और व्यवस्थित बनाने में रेलवे कर्मचारियों का साथ दें।
“सम्मान टीटीई का – सुरक्षित सफर हमारा।”
स्वर्गीय श्री गंगा प्रसाद यादव जी को विनम्र श्रद्धांजलि।
उनकी ईमानदारी, सेवा, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा सदैव प्रेरणा देती रहेगी।
शत-शत नमन। 🙏










