शताब्दी एक्सप्रेस में फर्जी टीटी बनकर यात्रा कर रहा युवक आरपीएफ के हत्थे चढ़ा फर्जी रेलवे पहचान पत्र के सहारे यात्रियों के बीच बना रहा था टीटीई, गाजियाबाद में जीआरपी को सौंपा गया
रिपोर्ट नवीन यादव
कानपुर। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की सतर्कता से शताब्दी एक्सप्रेस में फर्जी टिकट परीक्षक (टीटीई) बनकर यात्रा कर रहे एक युवक का भंडाफोड़ हुआ। युवक फर्जी रेलवे पहचान पत्र के सहारे स्वयं को टीटीई बताकर यात्रियों के बीच घूम रहा था। संदेह होने पर आरपीएफ ने उससे पूछताछ की, जिसमें उसकी सच्चाई सामने आ गई। इसके बाद उसे अग्रिम वैधानिक कार्रवाई के लिए गाजियाबाद स्टेशन पर जीआरपी एवं आरपीएफ के सुपुर्द कर दिया गया।
जानकारी के अनुसार, गाड़ी संख्या 12033 शताब्दी एक्सप्रेस में कानपुर सेंट्रल से नई दिल्ली तक अनुरक्षण ड्यूटी पर तैनात आरपीएफ के हेड कांस्टेबल लीलाधर तथा कांस्टेबल मनोज कुमार-2 सुरक्षा व्यवस्था पर निगरानी कर रहे थे। इसी दौरान अलीगढ़ स्टेशन से एक युवक कोच संख्या सी-11 में सवार हुआ और स्वयं को रेलवे का टिकट परीक्षक बताने लगा।
युवक की गतिविधियां संदिग्ध प्रतीत होने पर आरपीएफ कर्मियों ने ट्रेन सुपरिटेंडेंट जितेंद्र सिंह यादव तथा कोच टीटी अनुज कुमार के साथ मिलकर उससे पूछताछ की। प्रारंभ में उसने स्वयं को नॉर्दर्न रेलवे में कार्यरत टीटीई बताया, लेकिन गहन पूछताछ के दौरान वह अपने जवाबों में उलझ गया। कड़ाई से पूछताछ करने पर उसने स्वीकार किया कि वह रेलवे का कर्मचारी नहीं है और फर्जी रेलवे पहचान पत्र बनवाकर टीटीई बनकर यात्रा कर रहा था।
पूछताछ में आरोपी ने अपना नाम दुर्वेश कुमार, पुत्र भोजराज, निवासी ग्राम नगला, जनपद एटा बताया। इसके बाद आरपीएफ ने उसे हिरासत में लेकर गाजियाबाद स्टेशन पर जीआरपी के हेड कांस्टेबल सोनू सिंह एवं आरपीएफ के एएसआई ओवेन्द सिंह के सुपुर्द कर दिया, जहां उसके विरुद्ध नियमानुसार वैधानिक कार्रवाई शुरू कर दी गई।
आरपीएफ अधिकारियों ने बताया कि मामले की जांच जारी है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि आरोपी ने फर्जी रेलवे पहचान पत्र कहां और किसकी सहायता से तैयार कराया। रेलवे सुरक्षा बल ने यात्रियों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति संदिग्ध गतिविधियों में संलिप्त दिखाई दे या स्वयं को रेलवे कर्मचारी बताकर भ्रमित करने का प्रयास करे, तो इसकी तत्काल सूचना आरपीएफ या रेलवे अधिकारियों को दें।










