क्या आगरा कैंट की एक घटना से आरपीएफ की वर्षों की सेवा, लाखों यात्रियों की सुरक्षा और शहीद जवानों के सर्वोच्च बलिदान को भुला दिया जाए? हर दिन हजारों यात्रियों की सुरक्षा, मानव तस्करी पर प्रहार, नशा तस्करों की गिरफ्तारी, खोया सामान लौटाकर जीत रहा भरोसा, फिर भी आगरा कैंट प्रकरण की निष्पक्ष जांच आवश्यक
रिपोर्ट: नवीन यादव
आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर हुए विवाद के बाद रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) की कार्यशैली पर देशभर में चर्चा शुरू हो गई है। वायरल वीडियो के आधार पर अनेक प्रकार की प्रतिक्रियाएं सामने आईं, लेकिन इस बीच एक महत्वपूर्ण प्रश्न भी उठ रहा है—क्या किसी एक घटना के आधार पर आरपीएफ की वर्षों की सेवा, समर्पण, कर्तव्यनिष्ठा और बलिदान को भुला देना उचित होगा?
रेलवे सुरक्षा बल भारतीय रेल की सुरक्षा व्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है। देशभर में करोड़ों यात्रियों की सुरक्षित यात्रा सुनिश्चित करने के लिए आरपीएफ के जवान दिन-रात, हर मौसम और हर परिस्थिति में अपने कर्तव्यों का निर्वहन करते हैं। त्योहार हो या आपात स्थिति, रेलवे स्टेशनों और ट्रेनों में यात्रियों की सुरक्षा की जिम्मेदारी इन्हीं जवानों के कंधों पर होती है।
मानव तस्करी के खिलाफ मजबूत अभियान
आरपीएफ द्वारा चलाए जा रहे ऑपरेशन नन्हे फरिश्ते और ऑपरेशन एएएचटी के माध्यम से हजारों नाबालिग लड़के-लड़कियों को मानव तस्करों के चंगुल से सुरक्षित मुक्त कराया गया है। कई मामलों में तस्करों को गिरफ्तार कर जेल भेजा गया और बिछड़े बच्चों को उनके परिवारों से मिलाया गया। महिला यात्रियों और बच्चों की सुरक्षा के क्षेत्र में भी आरपीएफ की भूमिका लगातार सराहनीय रही है।
हर दिन हजारों यात्रियों की सुरक्षा, मानव तस्करी पर प्रहार, नशा तस्करों की गिरफ्तारी और खोया सामान लौटाकर जीत रहा भरोसा
आरपीएफ लगातार रेलवे मार्गों से होने वाली गांजा, शराब और अन्य मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करता है। समय-समय पर लाखों रुपये के प्रतिबंधित पदार्थ बरामद कर तस्करों को गिरफ्तार किया जाता है। इसके साथ ही यात्रा के दौरान खोया हुआ मोबाइल, बैग, नकदी, आभूषण तथा अन्य कीमती सामान खोजकर वास्तविक मालिकों को लौटाने के हजारों उदाहरण हर वर्ष सामने आते हैं। दुर्घटनाओं के समय यात्रियों की जान बचाना, संकट में फंसे लोगों की मदद करना और रेलवे संपत्ति की सुरक्षा करना भी आरपीएफ की प्रमुख जिम्मेदारियों में शामिल है।
कर्तव्य निभाते हुए कई आरपीएफ जवानों ने दिया सर्वोच्च बलिदान
रेलवे सुरक्षा बल केवल कानून-व्यवस्था बनाए रखने तक सीमित नहीं है, बल्कि देश और रेलवे संपत्ति की सुरक्षा करते हुए अनेक आरपीएफ जवानों ने अपने प्राणों का सर्वोच्च बलिदान भी दिया है। अपराधियों से मुकाबला करते समय, रेल दुर्घटनाओं में राहत एवं बचाव कार्य के दौरान तथा यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित करते हुए कई जवान शहीद हुए हैं। उनका बलिदान आरपीएफ की साहस, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा की अमिट पहचान है।
आगरा कैंट प्रकरण की निष्पक्ष जांच भी उतनी ही आवश्यक
आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर हुई घटना की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच होना अत्यंत आवश्यक है। यदि जांच में किसी भी पक्ष की गलती सामने आती है तो उसके विरुद्ध रेलवे के नियमों के अनुसार कार्रवाई होनी चाहिए। लेकिन जांच पूरी होने से पहले पूरे रेलवे सुरक्षा बल की छवि पर प्रश्नचिह्न लगाना और उसके वर्षों के सेवा कार्यों, उपलब्धियों तथा बलिदान को नजरअंदाज करना भी उचित नहीं होगा।
निष्पक्ष जांच, जवाबदेही और न्याय ही किसी भी लोकतांत्रिक व्यवस्था की आधारशिला हैं। किसी भी घटना का मूल्यांकन तथ्यों और जांच के आधार पर होना चाहिए। यदि दोष सिद्ध होता है तो दोषियों पर कार्रवाई अवश्य हो, लेकिन उसके आधार पर पूरे रेलवे सुरक्षा बल की वर्षों की सेवा, मानव तस्करी के खिलाफ अभियान, नशा तस्करों पर कार्रवाई, यात्रियों की सुरक्षा, खोया सामान लौटाने की ईमानदार पहल तथा कर्तव्य निभाते हुए शहीद हुए जवानों के सर्वोच्च बलिदान को भुला देना न्यायोचित नहीं कहा जा सकता।










