टिकट मांगा तो ‘नेतागिरी’ शुरू! एसी कोच में बिना टिकट सफर का वीडियो वायरल, भाजपा नेता पर टीटीई को धमकाने के आरोप ‘22 साल से भाजपा में हूं, सांसद-विधायकों से उठना-बैठना है’—वायरल वीडियो में कथित नेता का दावा; टीटीई से बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर मचा रहा हड़कंप
- टिकट मांगा तो ‘नेतागिरी’ शुरू! एसी कोच में बिना टिकट सफर का वीडियो वायरल, भाजपा नेता पर टीटीई को धमकाने के आरोप
‘22 साल से भाजपा में हूं, सांसद-विधायकों से उठना-बैठना है’—वायरल वीडियो में कथित नेता का दावा; टीटीई से बहस का वीडियो सोशल मीडिया पर मचा रहा हड़कंप
बक्सर। VERDICT NEWS
रेल में आम यात्री टिकट न होने पर जुर्माना भरता है, लेकिन क्या राजनीतिक रसूख का दावा करने वाले यात्रियों के लिए रेलवे के नियम अलग हैं? सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने इसी सवाल को जन्म दे दिया है। वीडियो में एसी कोच में टिकट जांच के दौरान एक कथित भाजपा नेता और टीटीई के बीच तीखी बहस होती दिखाई दे रही है।
वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि टीटीई ने जब कथित भाजपा नेता और उनके साथी से यात्रा टिकट दिखाने को कहा तो मामला टिकट जांच से निकलकर कथित तौर पर राजनीतिक पहुंच और प्रभाव तक पहुंच गया। आरोप है कि टिकट दिखाने के बजाय टीटीई पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को गाली देने का आरोप लगाया गया और कथित तौर पर नौकरी से हटवाने की धमकी भी दी गई।
वीडियो में कथित नेता खुद को करीब 22 वर्षों से भाजपा से जुड़ा बताते हुए सांसद और विधायक से अपने संबंधों का हवाला देते नजर आ रहे हैं। इतना ही नहीं, वीडियो में बक्सर के अधिकारियों से अपनी पहचान की पुष्टि कराने की बात भी कही जा रही है।
टिकट जांच या राजनीतिक दबाव?
यही वह सवाल है जो इस वायरल वीडियो के बाद सबसे बड़ा बनकर सामने आया है। रेलवे में टिकट जांच के दौरान यात्री की पहचान महत्वपूर्ण है या उसके पास वैध टिकट? यदि कोई यात्री बिना टिकट या अनियमित टिकट के साथ यात्रा कर रहा है तो क्या उसे रेलवे के नियमों के अनुसार कार्रवाई का सामना नहीं करना चाहिए?
और अगर वीडियो में किए जा रहे दावे सही हैं, तो क्या किसी कर्मचारी को केवल इसलिए दबाव में आना चाहिए क्योंकि सामने वाला व्यक्ति खुद को किसी राजनीतिक दल से जुड़ा बता रहा है?
रेलवे से कार्रवाई पर सवाल
वायरल वीडियो के सामने आने के बाद अब निगाहें रेलवे प्रशासन पर भी हैं। क्या संबंधित टीटीई ने इस मामले की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को दी? क्या कथित यात्री के खिलाफ रेलवे नियमों के तहत कोई कार्रवाई हुई? क्या यात्रा का टिकट वास्तव में मौजूद था या नहीं? इन सवालों के जवाब रेलवे प्रशासन की आधिकारिक जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेंगे।
VERDICT NEWS यह स्पष्ट करता है कि वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हुई है। वीडियो में दिखाई दे रहे व्यक्ति की पहचान और घटना की पूरी परिस्थितियों की आधिकारिक पुष्टि भी अभी सामने नहीं आई है।
लेकिन सवाल बड़ा है—रेलवे की एसी बोगी में टिकट जांच के दौरान अगर नियमों से ऊपर राजनीतिक पहचान का दावा सामने आने लगे, तो आम यात्री के लिए कानून और रसूखदारों के लिए अलग व्यवस्था कैसे चलेगी?
अब देखना यह है कि रेलवे प्रशासन इस वायरल वीडियो का संज्ञान लेकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करता है या फिर यह मामला भी सोशल मीडिया के शोर के साथ कुछ दिनों बाद दबकर रह जाता है।
रिपोर्ट: नवीन यादव
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