बैरिकेडिंग उखाड़ी, ट्रैक किनारे उतारा ट्रैक्टर-कंप्रेसर; रेल सुरक्षा से खिलवाड़ पर आरपीएफ का शिकंजा बिना अनुमति रेलवे की सुरक्षा जाली हटाकर चल रही थी खुदाई, रेल पथ निरीक्षक की शिकायत पर तीन गिरफ्तार; जब्त हुआ ट्रैक्टर और कंप्रेसर
रिपोर्ट नवीन यादव
झांसी। रेलवे ट्रैक की सुरक्षा से खिलवाड़ का मामला सामने आते ही आरपीएफ ने ठेकेदार के कार्य में लगे तीन लोगों पर शिकंजा कस दिया। वीरांगना लक्ष्मीबाई झांसी-बिजौली रेलखंड के बीच बिना अनुमति रेलवे की सुरक्षा बैरिकेडिंग हटाकर ट्रैक के किनारे ट्रैक्टर-कंप्रेसर से खुदाई कराई जा रही थी। रेल पथ निरीक्षक की शिकायत पर आरपीएफ सक्रिय हुई और तीनों को गिरफ्तार कर लिया। मौके पर इस्तेमाल किया जा रहा ट्रैक्टर और कंप्रेसर मशीन भी जब्त कर ली गई।
मामला 9 अगस्त का है। किलोमीटर संख्या 1121/27-29 पर रेलवे क्षेत्र में आर्मरिंग का काम चल रहा था। इसी दौरान रेलवे की ओर से लगाई गई सुरक्षा जाली हटा दी गई। सूचना मिलने पर आरपीएफ उपनिरीक्षक जितेंद्र सिंह यादव मौके पर पहुंचे तो तीन लोग ट्रैक के पास ट्रैक्टर पर लगी कंप्रेसर मशीन से खुदाई करते मिले।
पूछताछ में कृष्ण मोहन राजपूत ने खुद को ठेकेदार का पर्यवेक्षक बताया। रेलवे की सुरक्षा जाली हटाने की अनुमति मांगी गई तो कोई वैध अनुमति प्रस्तुत नहीं की जा सकी। तीनों ने अगले दिन अनुमति पत्र देने की बात कही। आरपीएफ ने उन्हें पोस्ट पर उपस्थित होने के निर्देश दिए।
10 अगस्त की रात जब तीनों आरपीएफ पोस्ट पहुंचे और अनुमति के बारे में पूछताछ हुई तो उन्होंने स्वीकार किया कि रेलवे की बैरिकेडिंग हटाने की उनके पास कोई अनुमति नहीं थी। इसके बाद आरपीएफ उपनिरीक्षक हरिओम सिंह सिकरवार ने रात करीब नौ बजे ट्रैक्टर-कंप्रेसर को जब्त कर लिया और रात 9:40 बजे तीनों को गिरफ्तार कर लिया।
गिरफ्तार आरोपियों की पहचान कृष्ण मोहन राजपूत (62), भरतन सहारिया (55) और कुलदीप सिंह (42) के रूप में हुई है। आरपीएफ ने तीनों के खिलाफ रेलवे अधिनियम की धारा 154 और 147 के तहत अपराध संख्या 1296/2026 दर्ज किया है।
रेलवे न्यायालय में पेश, न्यायिक अभिरक्षा की मांग
गिरफ्तारी के बाद तीनों आरोपियों को अपर मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (रेलवे), झांसी के न्यायालय में पेश किया गया। आरपीएफ ने रिमांड आवेदन में तीनों की 14-14 दिन की न्यायिक अभिरक्षा मांगी है। मामले की विवेचना उपनिरीक्षक हरिओम सिंह सिकरवार कर रहे हैं।
रेलवे ट्रैक के किनारे लगी सुरक्षा बैरिकेडिंग को हटाना महज नियमों की अनदेखी नहीं, बल्कि ट्रैक पर अनधिकृत प्रवेश और संभावित दुर्घटना का रास्ता खोलने वाला कदम माना जा रहा है। इसी वजह से आरपीएफ ने मामले को गंभीरता से लेते हुए कार्रवाई की।










