धरती को नापकर तय हुई थी एक मीटर की लंबाई, दिलचस्प है माप की इकाई बनने की कहानी
18वीं सदी के अंत तक माप के लिए राजाओं के हाथों या पैरों के नाप का इस्तेमाल किया जाता था।
आज हम बाजार से कपड़ा खरीदते समय या सड़क की दूरी नापते समय मीटर शब्द का इस्तेमाल करते हैं। लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक मीटर की लंबाई आखिर उतनी ही क्यों होती है, जितनी आज हम देखते हैं या इसे मापने का स्टैंडर्ड यूनिट कैसे बनाया गया?
दरअसल, माप की इस प्रणाली को बनाने के पीछे एक बेहद दिलचस्प कहानी है। आइए जानें कैसे मीटर बना मेजरमेंट का स्टैंडर्ड यूनिट।
मीटर की शुरुआत होने से पहले, यानी 18वीं सदी के अंत तक, माप की कोई एक स्टैंडर्ड यूनिट नहीं था। उस समय माप के तरीके बेहद भ्रमित करने वाले थे। अक्सर किसी क्षेत्र का माप वहां के राजा के शरीर के अंगों पर आधारित होता था, जैसे हाथ की लंबाई या पैर का आकार। अब क्योंकि हर राजा का शारीरिक माप अलग-अलग होता था, इसलिए व्यापार और अर्थव्यवस्था में इस वजह से काफी समस्या आती थी।










