पुनः बेतवा नदी में बना राख का बड़ा टापू। भानु सहाय ने जिलाधिकारी को सौंपा ज्ञापन, नदी के अस्तित्व को बचाने की मांग
झांसी।पारीछा थर्मल पावर प्लांट द्वारा बेतवा नदी में भारी मात्रा में राख प्रवाहित करने से निर्मित नब्बे हजार वर्ग फीट के टापू व नदी के तल में जमी राख को साफ कराने तथा प्लांट की चिमनियों से हो रहे अनियंत्रित वायु प्रदूषण व उड़ती राख से जनस्वास्थ्य एवं कृषि की रक्षा हेतु प्लांट प्रबंधन के खिलाफ कठोर कानूनी व दंडात्मक कार्रवाई किये जाने को कहा हैं।
झांसी जिले के पारीछा थर्मल पावर प्लांट से निकलने वाली जहरीली राख को नियमों को ताक पर रखकर लगातार पवित्र बेतवा नदी में प्रवाहित किया जा रहा है और साथ ही प्लांट की ऊंची चिमनियों से भी अनियंत्रित रूप से राख हवा में उड़ाई जा रही है जिससे नदी के अस्तित्व पर्यावरण और क्षेत्र के जनजीवन पर भारी संकट मंडरा रहा है प्लांट प्रबंधन की इस घोर लापरवाही और प्रदूषण नियंत्रण मानकों की खुली अनदेखी के कारण बेतवा नदी के भीतर लगभग नब्बे हजार वर्ग फीट का एक विशालकाय राख का टापू बन चुका है। भानु सहाय ने बताया कि कई किलोमीटर तक नदी का पूरा तल इस जहरीली राख की मोटी परत से पट गया है इस राख में मौजूद आर्सेनिक लेड कैडमियम क्रोमियम और मर्करी जैसे अत्यंत घातक और कैंसर पैदा करने वाले भारी केमिकल नदी के पानी में घुलकर उसे पूरी तरह विषाक्त और जानलेवा बना रहे हैं जिससे पानी का प्राकृतिक पीएच स्तर बिगड़ चुका है और पानी में ऑक्सीजन की भारी कमी के कारण मछलियां तथा अन्य जलीय जीव तड़प-तड़प कर मर रहे हैं।
नदी का प्राकृतिक प्रवाह अवरुद्ध होने से भविष्य में आस-पास के क्षेत्रों में बाढ़ का भयंकर खतरा पैदा हो गया है नदी प्रदूषण के साथ-साथ प्लांट की चिमनियों से चौबीसों घंटे बिना मानकों के भारी मात्रा में राख उड़कर आस-पास के क्षेत्रों में फैल रही है जिससे पूरा आसमान धुंध के आगोश में समा जाता है और हवा की गुणवत्ता इस कदर बदतर हो चुकी है कि स्थानीय नागरिकों का सांस लेना भी दूषित और दूभर साबित हो रहा है यह फ्लाई ऐश हवा के तेज झोंकों के साथ उड़कर पारीछा कॉलोनी सहित आस-पास के दर्जनों गांवों के घरों आंगनों छतों और पीने के पानी के स्रोतों पर एक मोटी परत के रूप में जम जाती है जिससे न केवल लोगों का घरेलू जीवन नारकीय बन चुका है बल्कि हवा में तैरते पीएम टू पॉइंट फाइव और पीएम टेन जैसे अत्यंत बारीक और घातक कण सांस के जरिए सीधे फेफड़ों में पहुंचकर मासूम बच्चों और बुजुर्गों को दमा टीबी ब्रोंकाइटिस और आंखों में भयंकर जलन जैसी असाध्य बीमारियों का शिकार बना रहे हैं।
उड़ती हुई राख आस-पास के उपजाऊ कृषि खेतों पर जमा होकर मिट्टी की उर्वरा शक्ति को पूरी तरह नष्ट कर रही है जिससे फसलें बर्बाद हो रही हैं और किसानों की आजीविका पर सीधा प्रहार हो रहा है इस दूषित पानी और दूषित हवा के रिसाव से आस-पास के गांवों का भूजल स्तर और हैंडपंप भी जहरीले हो चुके हैं जिससे स्थानीय जनता में कैंसर और किडनी फेलियर जैसी गंभीर बीमारियां तेजी से फैल रही हैं और इसी पानी से सिंचाई होने के कारण फसलों के माध्यम से यह धीमा जहर सीधे इंसानों और मवेशियों के शरीर में पहुंच रहा है।
पत्र में मांग की गई कि जल प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम तथा वायु प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण अधिनियम के तहत इस अत्यंत गंभीर पर्यावरणीय और सार्वजनिक स्वास्थ्य आपदा का तत्काल संज्ञान लेते हुए पारीछा थर्मल प्लांट के खिलाफ कठोर दंडात्मक कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए और बेतवा नदी में राख बहाने पर तुरंत रोक लगाते हुए नदी के तल और इस नब्बे हजार वर्ग फीट के टापू से राख को साफ कराने तथा चिमनियों से राख के इस अनियंत्रित उत्सर्जन को आधुनिक फिल्टरेशन तकनीकों के माध्यम से तत्काल रुकवाने हेतु कड़े प्रशासनिक निर्देश जारी करने की कृपा की जाए ताकि बुंदेलखंड की जीवनदायिनी बेतवा नदी और लाखों नागरिकों के जीवन व स्वास्थ्य को बचाया जा सके।
जिला अधिकारी ने सिंचाई एवं संबंधित अधिकारियों से निरीक्षण आख्या तुरन्त मांगी हैं। आख्या प्राप्त होने के बाद प्रशासनिक अधिकारियों को स्थलीय जांच करने भेजा जाएगा।
पत्र सौंपने वालों में मोर्चा अध्यक्ष भानू सहाय, महामंत्री अशोक सक्सेना अधिवक्ता, रघुराज शर्मा, वरुण अग्रवाल अधिवक्ता, हनीफ खान, पंकज रावत, नरेंद्र कुशवाहा, पंकज रावत, रवि माथुर अधिवक्ता, राजेंद्र कुमार आदि उपस्थित रहे ।
———————————————————————————————————– पारीछा में बेतवा नदी में बने राख के टापू पर खेला गया क्रिकेट
झांसी में उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा निर्मित पारीछा थर्मल पावर प्लांट द्वारा विद्युत उत्पादन कोयले से किया जाता हैं। जले हुए कोयले की राख एवं जले हुए तेल को नियमानुसार निस्तारित किया जाना चाहिए।
लम्बे समय से पारीछा थर्मल पावर प्लांट द्वारा कोयले की राख एवं जले हुए तेल को बुंदेलखंड की जीवनदायनी नदी बेतवा में बहाया जा रहा है। साथ ही चिमनियों से कोयले की राख को उड़ाया जा रहा है जिससे प्लांट के नजदीक के अनेक ग्रामों में लोगों के गम्भीर बीमारियां हो चुकी हैं।
पारीछा थर्मल पावर प्लांट द्वारा कोयले की जली हुई राख को बेतवा नदी में बहाने से विशाल राख का टापू बन गया हैं। इस टापू पर बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा के योद्धाओं ने क्रिकेट खेला। टापू इतना बढ़ा हैं कि क्रिकेट खेलने में कोई परेशानी नहीं हुई। टापू पर क्रिकेट खेल कर सरकार की आँख खोल कर बेतवा नदी और पारीछा बांध कर बचाने का प्रयास किया गया। देश में ये पहली बार देखा गया हैं कि नदी की मुख्य धारा के बीच में बने राख के टापू पर क्रिकेट खेला गया हो।
प्रदूषण की रोक थाम एवं नियंत्रण अधिनियम के अंतर्गत सिंचाई विभाग को कानूनी कार्यवाही के देना चाहिए थी। जनप्रतिनिधि एवं संबंधित अधिकारी बेतवा नदी एवं पारीछा बांध को नष्ट होते देख रहे हैं।
इस टापू के अलावा भी दो और बड़े टापू बेतवा नदी में बने हुए है जो अभी सात, आठ इंच पानी के नीचे हैं जो बांध का पानी थोड़ा कम होने पर बाहर निकल आयेगे।
बहुत जल्दी वो समय आने वाला हैं जब पारीछा से हमीरपुर तक के हजारों ग्राम में पेयजल एवं सिंचाई के लाले पड़ने वाले हैं। बुंदेलखंड क्षेत्र में कृषि शून्यता की ओर चली जाएगी जिससे जमीन बंजर हो जाएगी।
तत्काल केंद्र और राज्य सरकार को पहल कर बेतवा एवं पारीछा बांध को बचाए।
बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा शीघ्र एन.जी.टी में वाद दाखिल कर क्षेत्र की जीवनदायनी बेतवा नदी एवं पारीछा बांध को बचाने के लिए हर सम्भव जतन किए जाएंगे।
राख के टापू पर क्रिकेट खेलने वालों में पहली टीम बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा की जिसमें मोर्चा अध्यक्ष भानू सहाय, महामंत्री अशोक सक्सेना, प्रवक्ता रघुराज शर्मा, कोषाध्यक्ष वरुण अग्रवाल, हनीफ खान, रामजी पारीछा, प्रदीप झा, गोलू ठाकुर, अभिषेक तिवारी, नरेंद्र कुशवाहा, नजमा खान, प्रफुल्ल तिवारी, व्योम अग्रवाल।
दूसरी टीम ग्राम पारीछा की रही जिसमें रामजी सिंह जादौन, रमेश रायकवार रमेत परिहार, बंटी सेन , सागर जादौन, नरेंद्र अहिरवार, राजेश रायकवार, मांसु रायकवार, रणजीत जादौन, रघुवीर जादौन, नरेंद्र कुमार, टिंकू रायकवार, एम्पायर नरेंद्र कुमार और धीरेन्द्र रायकवार रहे, रघुवीर रायकवार एवं लाल मन कुमार एक्सपर्ट एम्पायर रहे।

बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा










