पीसीओएम के समक्ष गार्ड काउंसिल ने उठाए कोटा मंडल के ट्रेन मैनेजरों के मुद्दे वर्किंग दूसरे मंडलों को सौंपने पर जताई नाराजगी, संरक्षा और रोजगार पर असर का जताया अंदेशा
रिपोर्ट: नवीन यादव
कोटा। ऑल इंडिया गार्ड काउंसिल ने प्रमुख मुख्य परिचालन प्रबंधक (पीसीओएम) को ज्ञापन सौंपकर कोटा मंडल के ट्रेन मैनेजरों (गार्ड) से जुड़ी विभिन्न समस्याओं को प्रमुखता से उठाया। काउंसिल ने आरोप लगाया कि कोटा मंडल के ट्रेन मैनेजरों का कार्य लगातार कम किया जा रहा है तथा कई महत्वपूर्ण ट्रेनों की वर्किंग अन्य मंडलों को स्थानांतरित की जा रही है, जिससे स्थानीय कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है।
ज्ञापन में बताया गया कि कोटा मंडल में ड्यूटी के लिए ट्रेन मैनेजर उपलब्ध रहने के बावजूद कई मालगाड़ियों का संचालन बिना ट्रेन मैनेजर के कराया जा रहा है। काउंसिल का कहना है कि यह व्यवस्था न केवल कर्मचारियों के अधिकारों को प्रभावित कर रही है, बल्कि रेल संरक्षा के दृष्टिकोण से भी चिंता का विषय है।
काउंसिल ने यह भी उल्लेख किया कि 25 जुलाई से नियमित रूप से संचालित होने वाली काचीगुड़ा–श्रीगंगानगर (17601/17602) तथा मुंबई–काठगोदाम (21907/21908) ट्रेनों की वर्किंग कोटा मंडल के स्थान पर रतलाम मंडल को सौंप दी गई है। इससे पूर्व इंदौर–हिसार (20957/20958) और डॉ. आंबेडकर नगर–नई दिल्ली ट्रेन की वर्किंग भी कोटा मंडल से हटाकर रतलाम मंडल को दी जा चुकी है।
गार्ड काउंसिल ने मांग की कि कोटा मंडल के ट्रेन मैनेजरों को उनका नियमित कार्य पुनः उपलब्ध कराया जाए तथा लीव रिजर्व का कोटा पहले की तरह 30 प्रतिशत बहाल किया जाए। काउंसिल का कहना है कि इससे कर्मचारियों का मनोबल बढ़ेगा और परिचालन व्यवस्था भी अधिक प्रभावी होगी।
ज्ञापन सौंपने के दौरान काउंसिल के जनरल सचिव मनीष वैद्य सहित कई पदाधिकारी उपस्थित रहे। काउंसिल ने उम्मीद जताई कि रेलवे प्रशासन कर्मचारियों की मांगों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक निर्णय लेगा।










