लखनऊ अग्निकांड के बाद बड़ा सवाल: क्या झांसी के कोचिंग सेंटर सुरक्षित हैं?
रिपोर्ट नवीन यादव
झांसी/ लखनऊ में कोचिंग सेंटर में आग लगने से 15 छात्रों की दर्दनाक मौत ने पूरे उत्तर प्रदेश को झकझोर दिया है। यह घटना केवल राजधानी तक सीमित नहीं है, बल्कि झांसी सहित प्रदेश के सभी जिलों के लिए गंभीर चेतावनी है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या झांसी जिले में संचालित सैकड़ों कोचिंग सेंटर सुरक्षा मानकों का पालन कर रहे हैं?
झांसी शहर में सिविल लाइंस, सीपरी बाजार, एलाइट चौराहा, प्रेमनगर, मेडिकल कॉलेज क्षेत्र, शिवाजी नगर, नंदनपुरा, आवास विकास और अन्य क्षेत्रों में बड़ी संख्या में कोचिंग संस्थान संचालित हो रहे हैं। प्रतिदिन हजारों छात्र-छात्राएं इन संस्थानों में पढ़ाई के लिए पहुंचते हैं, लेकिन इनमें से कितने संस्थानों के पास वैध अग्निशमन अनापत्ति प्रमाणपत्र (फायर एनओसी) है? कितने भवनों में आपातकालीन निकास (इमरजेंसी एग्जिट), अग्निशमन यंत्र, फायर अलार्म और सुरक्षित निकासी की व्यवस्था है? यह एक महत्वपूर्ण प्रश्न है।
दिल्ली और लखनऊ जैसे हादसों के बाद फायर विभाग द्वारा समय-समय पर मॉक ड्रिल और जांच अभियान चलाए जाते हैं, लेकिन यदि सभी व्यवस्थाएं सही हैं तो बार-बार ऐसी घटनाएं क्यों सामने आ रही हैं? क्या झांसी में भी संबंधित विभागों ने सभी कोचिंग सेंटरों का नियमित निरीक्षण किया है या कार्रवाई केवल कागजों तक सीमित है?
झांसी में अधिकांश कोचिंग सेंटर व्यस्त बाजारों और बहुमंजिला व्यावसायिक भवनों में संचालित हो रहे हैं। कई स्थानों पर संकरे रास्ते, एक ही प्रवेश-निकास मार्ग और भीड़भाड़ जैसी परिस्थितियां किसी भी आपदा के समय राहत एवं बचाव कार्य को प्रभावित कर सकती हैं। ऐसे में जिला प्रशासन, फायर विभाग, झांसी विकास प्राधिकरण और नगर निगम को संयुक्त रूप से विशेष अभियान चलाकर प्रत्येक कोचिंग संस्थान का सुरक्षा ऑडिट कराना चाहिए।
लखनऊ की घटना के बाद अब झांसी में भी अभिभावकों और छात्रों के मन में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। प्रशासन को चाहिए कि केवल मॉक ड्रिल और निर्देश जारी करने तक सीमित न रहे, बल्कि जिन संस्थानों में सुरक्षा मानकों की अनदेखी हो रही है, उनके विरुद्ध सख्त कार्रवाई करे।
लखनऊ की त्रासदी पूरे प्रदेश के लिए चेतावनी है। यदि झांसी में समय रहते सुरक्षा व्यवस्था की निष्पक्ष जांच नहीं हुई, तो भविष्य में कोई भी दुर्घटना बड़ा रूप ले सकती है। अब आवश्यकता केवल औपचारिकताओं की नहीं, बल्कि जवाबदेही और प्रभावी कार्रवाई की है।










