बेतवा को राख में दफन करने वालों सुन लो : फुटबॉल की ये किक तुम्हारी ताबूत में आखिरी कील है – बुंदेलखंड अब राज्य बनकर रहेगा
झांसी। बेतवा नदी में पारीछा थर्मल प्लांट की राख से बने विशाल टापू पर रविवार को बुंदेलखंड निर्माण मोर्चा और ग्रामीणों ने फुटबॉल खेलकर अनोखा विरोध दर्ज कराया।
प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि वर्षों से नदी और पारीछा बांध में राख बहाई जा रही है, जिससे नदी का स्वरूप बदल रहा है और बांध की जल-धारण क्षमता घट रही है।
ग्रामीणों ने कहा कि फ्लाई ऐश का निस्तारण सड़क, ईंट-टाइल निर्माण में होना चाहिए, लेकिन जिम्मेदार अधिकारी इसे सीधे बेतवा में डाल रहे हैं।
इससे पहले भी इसी तरह के राख के टापू पर क्रिकेट खेलकर विरोध किया गया था। इस बार उससे भी बड़े टापू पर फुटबॉल खेलकर सरकार को जगाने की कोशिश की गई।
मोर्चा अध्यक्ष भानू सहाय ने नाव से नदी के बीच राख का जमाव दिखाया और कहा कि राख की सीमा जानने के लिए मशीनों से जांच जरूरी है।
ग्रामीणों का कहना है कि राख से नदी का जल, जलीय जीवन, खेती, भूजल और लोगों का स्वास्थ्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
मोर्चा ने सरकार से बेतवा और पारीछा बांध में राख जमाव की उच्चस्तरीय जांच और पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वालों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
यह लड़ाई सिर्फ पर्यावरण की नहीं, बुंदेलखंड राज्य के अस्तित्व की है। गांव-गांव में लोग अब बार-बार दोहरा रहे हैं कि जब तक बुंदेलखंड अलग राज्य नहीं बनेगा, तब तक नदियों और संसाधनों की लूट नहीं रुकेगी।
यदि समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो यह संकट पूरे बुंदेलखंड के भविष्य के लिए घातक होगा।
प्रदर्शन में भानू सहाय, रघुराज शर्मा, वरूण अग्रवाल, रामजी सिंह पारीछा, गिरजा शंकर राय, प्रदीप झा, हनीफ खान, नरेंद्र कुशवाहा, नरेंद्र सिंह प्रजापति पारीक्षा, बीरेंद्र सिंह रैकवार, रंजीत सिंह पारीक्षा, राजेश कुमार, नरेंद्र अहिरवार, बापू राजपूत, रघुवीर रैकवार, जितेन्द्र रैकवार, अखलेश अहिरवार, शिवा प्रजापति, हरी सिंह, शंभू सैन, मौशूर रैकवार, छोटू रैकवार, मनोज प्रजापति आदि उपस्थित रहे।
अब बुंदेलखंड का हर गांव यही मांग दोहरा रहा है – नदियां बचेंगी तभी बुंदेलखंड बचेगा, और बुंदेलखंड बचेगा तभी अलग राज्य की आवाज बुलंद होगी।










