रेल सुरक्षा सम्मेलन में पत्रकारों से दूरी, फिर प्रेस विज्ञप्ति क्यों? रेलवे वर्कशॉप में हुआ आरपीएफ का सुरक्षा सम्मेलन—डीआरएम अनिरुद्ध कुमार समेत वरिष्ठ अधिकारियों और जवानों की मौजूदगी, लेकिन मीडिया को रखा बाहर अगर सुरक्षा सम्मेलन की चर्चा संवेदनशील और गोपनीय थी, तो मीडिया को बाहर रखने के बाद उसकी प्रेस विज्ञप्ति जारी करने का औचित्य क्या था?
रिपोर्ट: नवीन यादव | VERDICT NEWS
झांसी। उत्तर मध्य रेलवे के झांसी मंडल में रेलवे वर्कशॉप में आयोजित रेल सुरक्षा बल (आरपीएफ) के सुरक्षा सम्मेलन को लेकर मीडिया से दूरी बनाए जाने पर सवाल खड़े हो रहे हैं। सम्मेलन में झांसी मंडल रेल प्रबंधक अनिरुद्ध कुमार सहित रेलवे के विभिन्न विभागों के अधिकारी, आरपीएफ के वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त, निरीक्षक, उपनिरीक्षक और बड़ी संख्या में जवान मौजूद रहे। इसके बावजूद पत्रकारों को सम्मेलन से दूर रखा गया।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि यह सम्मेलन रेल सुरक्षा से जुड़ी संवेदनशील अथवा गोपनीय विषय-वस्तु के कारण मीडिया की पहुंच से बाहर रखा गया था, तो फिर सम्मेलन के बाद इसकी प्रेस विज्ञप्ति जारी करने की आवश्यकता क्यों पड़ी?
वहीं, यदि सम्मेलन में चर्चा किए गए विषयों का कुछ हिस्सा सार्वजनिक करने योग्य था और रेलवे प्रशासन स्वयं उसकी जानकारी प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से मीडिया तक पहुंचा रहा है, तो फिर पत्रकारों को सम्मेलन की कवरेज से दूर रखने का औचित्य क्या था?
मीडिया के लिए अलग-अलग पैमाने क्यों?
रेलवे और आरपीएफ से जुड़े कार्यक्रमों में आमतौर पर मीडिया को सूचना उपलब्ध कराई जाती है, ताकि आम यात्रियों और जनता तक सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित जानकारी पहुंच सके। ऐसे में सुरक्षा सम्मेलन के दौरान पत्रकारों को आमंत्रित न करना और बाद में केवल प्रेस विज्ञप्ति के जरिए कार्यक्रम की जानकारी देना मीडिया नीति और पारदर्शिता को लेकर सवाल खड़े करता है।
यह सवाल भी महत्वपूर्ण है कि क्या सम्मेलन में मौजूद सभी विषय वास्तव में गोपनीय थे, या सम्मेलन की कवरेज से मीडिया को दूर रखने का निर्णय किसी अन्य कारण से लिया गया?
प्रेस विज्ञप्ति से उठे सवालों का जवाब कौन देगा?
यदि सम्मेलन में सुरक्षा व्यवस्था, यात्रियों की सुरक्षा, रेलवे परिसंपत्तियों की सुरक्षा और आगामी चुनौतियों पर चर्चा हुई, तो इन विषयों की जानकारी जनता तक पहुंचना भी जरूरी है। लेकिन यदि कार्यक्रम की जानकारी मीडिया को कार्यक्रम स्थल पर उपलब्ध कराने के बजाय बाद में केवल प्रेस विज्ञप्ति के जरिए दी जाती है, तो यह व्यवस्था पत्रकारों के बीच स्वाभाविक रूप से सवाल पैदा करती है।
रेलवे प्रशासन को स्पष्ट करना चाहिए कि आरपीएफ सुरक्षा सम्मेलन को मीडिया से दूर रखने का निर्णय किस स्तर पर लिया गया और इसके पीछे क्या कारण था?
अगर कार्यक्रम गोपनीय था तो प्रेस विज्ञप्ति क्यों?
और अगर कार्यक्रम गोपनीय नहीं था तो पत्रकारों को कवरेज से दूर क्यों रखा गया?
यही सवाल अब झांसी मंडल रेल प्रशासन और आरपीएफ से जवाब मांग रहे हैं।










