आगरा कैंट विवाद में नया मोड़, एससी-एसटी अधिनियम में डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट समेत 10 के खिलाफ मुकदमे के आदेश विशेष अदालत के आदेश के बाद रेलवे महकमे में हड़कंप, दोनों पक्षों के बीच बढ़ा तनाव
झांसी/ आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर 12 जुलाई को डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट नरेंद्र सिंह चाहर और रेलवे सुरक्षा बल के जवानों के बीच हुए विवाद ने एक बार फिर तूल पकड़ लिया है। मामले में विशेष न्यायालय के आदेश के बाद राजकीय रेलवे पुलिस कैंट थाने में नरेंद्र सिंह चाहर समेत करीब 10 लोगों के खिलाफ अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम समेत अन्य गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू हो गई है। अदालत के इस आदेश के बाद रेलवे महकमे में हलचल तेज हो गई है।
प्लेटफॉर्म पर हुई थी तीखी झड़प
बताया गया है कि 12 जुलाई को आगरा कैंट स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर हीराकुंड एक्सप्रेस के ठहराव के दौरान डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट नरेंद्र सिंह चाहर और रेलवे सुरक्षा बल के जवानों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया था। देखते ही देखते दोनों पक्षों में तीखी बहस शुरू हो गई और मामला हाथापाई तक पहुंच गया।
घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट को रेलवे सुरक्षा बल के जवानों द्वारा प्लेटफॉर्म पर घसीटे जाने का दृश्य दिखाई दिया। वीडियो सामने आने के बाद मामला उच्च अधिकारियों तक पहुंचा और रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया था।
चार रेलवे सुरक्षा बल जवान किए गए थे निलंबित
घटना के बाद उत्तर मध्य रेलवे प्रशासन ने तत्काल कार्रवाई करते हुए रेलवे सुरक्षा बल के चार जवानों—सहायक उप निरीक्षक मेघराज मीणा, सहायक उप निरीक्षक बालकिशन, कांस्टेबल जितेंद्र और कांस्टेबल बदन सिंह को निलंबित कर दिया था। पूरे प्रकरण की जांच के लिए उच्चस्तरीय समिति भी गठित की गई थी।
वहीं, डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट की ओर से दी गई शिकायत के आधार पर रेलवे सुरक्षा बल के जवानों के खिलाफ भी मामला दर्ज किया गया था।
19 अगस्त को अदालत के आदेश से बदला घटनाक्रम
अब मामले में 19 अगस्त को नया मोड़ सामने आया। रेलवे सुरक्षा बल के सहायक उप निरीक्षक मेघराज मीणा की ओर से न्यायालय में प्रस्तुत की गई अर्जी पर सुनवाई के बाद विशेष न्यायाधीश ने डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट नरेंद्र सिंह चाहर तथा आठ से दस अन्य लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने का आदेश दिया है। आरोपों में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति अधिनियम समेत अन्य धाराएं शामिल किए जाने की बात सामने आई है।
अदालत के आदेश के बाद राजकीय रेलवे पुलिस कैंट थाने में आगे की कानूनी कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।
दोनों पक्षों के आरोप अलग-अलग
पूरे विवाद में दोनों पक्षों की ओर से एक-दूसरे पर गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। संचालन विभाग से जुड़े पक्ष का कहना है कि रेलवे सुरक्षा बल के जवानों ने डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट के साथ अभद्रता और मारपीट की, जबकि रेलवे सुरक्षा बल से जुड़े पक्ष ने भी अपने साथ कथित दुर्व्यवहार और उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं।
फिलहाल अदालत के आदेश के बाद मामले की दिशा बदलती नजर आ रही है। एक ओर पहले से निलंबित रेलवे सुरक्षा बल के जवानों के खिलाफ कार्रवाई का मामला चल रहा है, वहीं दूसरी ओर अब डिप्टी स्टेशन सुपरिटेंडेंट समेत अन्य लोगों के खिलाफ भी मुकदमा दर्ज किए जाने का रास्ता खुल गया है।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी तस्वीर
आगरा कैंट रेलवे स्टेशन पर हुए इस विवाद ने रेलवे की सुरक्षा व्यवस्था और विभागों के बीच समन्वय को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। अब पुलिस जांच और न्यायालयीन प्रक्रिया के दौरान सामने आने वाले तथ्यों से ही स्पष्ट होगा कि विवाद की वास्तविक शुरुआत किस बात को लेकर हुई और घटना के दौरान किस पक्ष की भूमिका क्या रही।
रिपोर्ट: नवीन यादव
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