योगी सरकार की स्टार्टअप नीति से झांसी की बुन्देली चितेरी कला ने अमेरिका और दुबई में बनाई पहचान
झांसी का ‘सराहना हैण्डीक्राफ्ट’ स्टार्टअप योगी सरकार की नीतियों और बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के सहयोग से बुन्देली कला को अमेरिका और दुबई जैसे देशों तक पहुँचा रहा है। यह स्टार्टअप 100 से अधिक महिलाओं को आजीविका प्रदान कर रहा है और नई पीढ़ी को पारम्परिक कला का प्रशिक्षण भी दे रहा है।
झांसी। उत्तर प्रदेश सरकार की स्टार्टअप प्रोत्साहन नीति और बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के इनक्यूबेशन सेण्टर के साझा प्रयासों से बुंदेलखंड की धरती पर एक नया इतिहास लिखा जा रहा है। झांसी का ‘सराहना हैण्डीक्राफ्ट’ स्टार्टअप आज इस बात का जीवंत उदाहरण बनकर उभरा है कि यदि स्थानीय कला को सही मार्गदर्शन, नवाचार और आधुनिक उद्यमिता का साथ मिले, तो छोटे शहरों के उत्पाद भी वैश्विक बाजार में अपनी धाक जमा सकते हैं। योगी सरकार की नीतियों के दम पर यह स्टार्टअप बुन्देली विरासत को दुनिया के कोने-कोने तक पहुँचा रहा है।
अमेरिका और दुबई में बुन्देली कला की धूम
बुन्देली लोककला ‘चितेरी’, रेजिन आर्ट, लिपिन आर्ट और अन्य पारम्परिक कला विधाओं पर आधारित यह स्टार्टअप हर महीने लगभग 5,000 हैण्डीक्राफ्ट और पेण्टिंग तैयार कर रहा है। आज इन अनूठे उत्पादों की माँग केवल भारत के महानगरों तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिका, दुबई और थाइलैण्ड सहित दुनिया के कई बड़े देशों में नियमित रूप से इनके उत्पाद भेजे जा रहे हैं। आधुनिक बाजार की पसंद के साथ पारंपरिक कला का यह फ्यूजन अंतरराष्ट्रीय खरीदारों को बेहद पसंद आ रहा है।
100 से अधिक महिलाओं को मिला आजीविका का साधन
इस स्टार्टअप की संस्थापक राशि दुबे ने अपने इस विजन को केवल मुनाफे वाले व्यवसाय तक सीमित नहीं रखा, बल्कि इसे एक बड़े सामाजिक और आर्थिक बदलाव का जरिया बनाया है। उन्होंने ग्रामीण क्षेत्र की महिलाओं को चितेरी कला एवं हैण्डीक्राफ्ट का विशेष प्रशिक्षण देकर उन्हें स्वरोजगार से जोड़ा है। वर्तमान में लगभग 100 से अधिक युवतियाँ और महिलाएँ इस पहल से जुड़कर गरिमापूर्ण आजीविका कमा रही हैं।
नई पीढ़ी को मिल रहा पारम्परिक कला का ज्ञान
अपनी संस्कृति को जीवित रखने के लिए यह स्टार्टअप नई पीढ़ी को भी तैयार कर रहा है। झांसी के सरस्वती विद्या मन्दिर में लगभग 150 छात्राओं को चितेरी कला का मुफ्त प्रशिक्षण दिया जा रहा है, ताकि आने वाली पीढ़ी अपनी समृद्ध लोककला से जुड़ी रहे। कला के संरक्षण और महिला सशक्तिकरण का यह बेहतरीन समावेश इस स्टार्टअप को समाज में एक नई और आदरणीय पहचान दे रहा है।
‘स्टार्ट इन यूपी’ योजना से मिलेगी बड़ी ग्राण्ट
बुन्देलखण्ड विश्वविद्यालय के इनक्यूबेशन सेण्टर के सहयोग से वर्ष 2025 में पंजीकृत हुए इस स्टार्टअप को अब तक बेहतरीन तकनीकी मार्गदर्शन और व्यावसायिक परामर्श मिला है। इस बड़ी सफलता के बाद अब इसे यूपी सरकार की ‘स्टार्ट इन यूपी’ योजना के तहत वित्तीय ग्राण्ट दिलाने की आधिकारिक प्रक्रिया भी प्रारम्भ कर दी गई है। यह सफलता साबित करती है कि सही पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) मिलने पर यूपी के छोटे शहरों के युवा भी ग्लोबल लीडर बन सकते हैं।










