सूत्रों के मुताबिक किसी संस्थान ने आईआरसीटीसी से पूरा कोच कराया था बुक, चलती ट्रेन में दीपक जलाने पर सुरक्षा को लेकर उठे सवाल जब ट्रेन में नमाज पढ़ने पर आपत्ति दर्ज कराई जाती है, तो धार्मिक गतिविधियों के लिए समान नियम लागू करने की उठी मांग
रिपोर्ट नवीन यादव
झांसी। सोशल मीडिया पर ट्रेन नंबर 12926 पश्चिम एक्सप्रेस के एसी कोच का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है। वीडियो में एक यात्री को ऊपरी बर्थ पर पूजा करते हुए धूपबत्ती और दीपक जलाते हुए देखा जा रहा है।
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार वायरल वीडियो पश्चिम एक्सप्रेस के इसी कोच का बताया जा रहा है। यह भी बताया जा रहा है कि किसी संस्थान की ओर से आईआरसीटीसी के माध्यम से पूरा कोच बुक कराया गया था। हालांकि, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हो सकी है।
वायरल वीडियो में एक सहयात्री द्वारा पूजा के दौरान धूपबत्ती और दीपक जलाने पर आपत्ति जताते हुए सुरक्षा का हवाला दिया गया। बताया गया कि चलती ट्रेन में खुली लौ जलाने से आग लगने का खतरा हो सकता है, जबकि धूपबत्ती के धुएं से अग्नि चेतावनी तंत्र भी सक्रिय हो सकता है।
क्या रेलवे करेगा कार्रवाई?
वीडियो वायरल होने के बाद अब सवाल उठ रहा है कि क्या रेलवे इस मामले का संज्ञान लेकर जांच और कार्रवाई करेगा। यदि वीडियो की जांच में ट्रेन के अंदर खुले दीपक या आग जलाने की पुष्टि होती है और इसे रेलवे के सुरक्षा नियमों का उल्लंघन पाया जाता है, तो रेलवे मामले की जांच कर संबंधित यात्रियों या जिम्मेदार पक्ष के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई कर सकता है। साथ ही, आईआरसीटीसी के माध्यम से पूरा कोच बुक कराने की जानकारी की भी पुष्टि की जा सकती है।
हालांकि, फिलहाल वायरल वीडियो के आधार पर किसी कार्रवाई की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। रेलवे की ओर से जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
जब ट्रेन में नमाज पढ़ने पर आपत्ति दर्ज कराई जाती है, तो धार्मिक गतिविधियों के लिए समान नियम लागू करने की उठी मांग
वहीं, इस मामले के सामने आने के बाद यह चर्चा भी शुरू हो गई है कि जब ट्रेन में किसी यात्री द्वारा नमाज पढ़ने पर आपत्तियां दर्ज कराई जाती हैं, तो धार्मिक आस्था से जुड़ी अन्य गतिविधियों के मामलों में भी रेलवे को एक समान और निष्पक्ष दृष्टिकोण अपनाना चाहिए। धार्मिक आस्था का सम्मान करते हुए यात्रियों की सुविधा, सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े नियम सभी यात्रियों पर समान रूप से लागू होने चाहिए।
जानकारों का मानना है कि रेलवे में किसी भी धार्मिक गतिविधि को लेकर विवाद के बजाय मुख्य प्राथमिकता यात्रियों की सुरक्षा, सुविधा और आपसी सौहार्द होनी चाहिए। यदि किसी गतिविधि से सुरक्षा को खतरा उत्पन्न होता है या यात्रियों को असुविधा होती है, तो रेलवे को धर्म या समुदाय के आधार पर भेदभाव किए बिना समान नियमों के तहत आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए।
यह मामला किसी धर्म या आस्था के विरोध से संबंधित नहीं है, बल्कि सार्वजनिक परिवहन में अग्नि सुरक्षा, यात्रियों की सुविधा और सभी के लिए समान नियमों के पालन से जुड़ा है।










