रिपोर्ट नवीन यादव
झांसी/ अंबाला। रेलवे की सुरक्षा और निगरानी व्यवस्था को धता बताते हुए छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 18238) में एक फर्जी ट्रैफिक विजिलेंस इंस्पेक्टर बेखौफ सफर करता मिला। अंबाला छावनी रेलवे स्टेशन पर आरोपी की गिरफ्तारी के बाद रेलवे महकमे में हड़कंप मच गया। सवाल यह है कि आखिर एक फर्जी अधिकारी रेलवे के नाम का फर्जी पहचान पत्र और वॉकी-टॉकी लेकर ट्रेन में घूमता रहा और जिम्मेदार सुरक्षा एजेंसियों को इसकी भनक तक क्यों नहीं लगी?
आरोपी के पास से रेलवे विजिलेंस का फर्जी पहचान पत्र और वॉकी-टॉकी बरामद किया गया है। फर्जी अधिकारी बनकर वह रेलवे कर्मचारियों और यात्रियों के बीच किस तरह का प्रभाव कायम करना चाहता था, यह जांच का विषय है। हालांकि, उसकी गिरफ्तारी ने रेलवे की निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल जरूर खड़े कर दिए हैं।
अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि आरोपी ने फर्जी पहचान पत्र कहां से बनवाया? क्या वह अकेले इस पूरे खेल को अंजाम दे रहा था या उसके पीछे कोई संगठित गिरोह सक्रिय है? क्या उसने इससे पहले भी रेलवे की ट्रेनों और स्टेशनों पर फर्जी अधिकारी बनकर किसी को ठगा या दबाव बनाया?
सुरक्षा एजेंसियों के लिए यह मामला महज एक गिरफ्तारी तक सीमित नहीं होना चाहिए। आरोपी से गहन पूछताछ कर उसके पूरे नेटवर्क का पर्दाफाश करना जरूरी है, ताकि यह सामने आ सके कि रेलवे के नाम पर फर्जी अधिकारी बनकर घूमने वालों का खेल आखिर कितने समय से चल रहा है।










