आरपीएफ में बड़े ऑपरेशन की तैयारी! कौन बचेगा, कौन जाएगा ? सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार तैनात अधिकारी-कर्मचारियों की तैयार हो रही सूची—सेवा रिकॉर्ड, एपीएआर, सतर्कता इनपुट और अनुशासनात्मक इतिहास पर नजर जीरो टॉलरेंस’ के बीच सुस्त और लापरवाह कार्यप्रणाली पर शिकंजे की तैयारी—जनहित में समय से पहले अनिवार्य सेवानिवृत्ति तक की कार्रवाई संभव

 

रिपोर्ट: नवीन यादव VERDICT NEWS

झांसी। रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) में तैनात अधिकारी-कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को लेकर बड़ी समीक्षा की तैयारी की जानकारी सामने आई है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार आरपीएफ में तैनात अधिकारी-कर्मचारियों की सूची तैयार की जा रही है। इस सूची के आधार पर सेवा रिकॉर्ड और कार्यप्रदर्शन की समीक्षा किए जाने की चर्चा है।

सूत्रों के मुताबिक समीक्षा में संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों की वार्षिक प्रदर्शन मूल्यांकन रिपोर्ट (एपीएआर), सेवा रिकॉर्ड, सतर्कता संबंधी इनपुट और अनुशासनात्मक इतिहास को महत्वपूर्ण आधार बनाया जा सकता है। खराब प्रदर्शन, लगातार कर्तव्य में लापरवाही अथवा प्रतिकूल सेवा रिकॉर्ड पाए जाने पर नियमानुसार कार्रवाई की संभावना जताई जा रही है।

कामकाज की होगी गहन पड़ताल

आरपीएफ की जिम्मेदारी यात्रियों की सुरक्षा और रेलवे संपत्ति की हिफाजत से सीधे जुड़ी है। ऐसे में तैनात अधिकारी-कर्मचारियों की कार्यप्रणाली की समीक्षा को महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

यदि किसी अधिकारी-कर्मचारी के रिकॉर्ड में लगातार खराब प्रदर्शन, अनुशासनहीनता या कर्तव्य के प्रति गंभीर लापरवाही सामने आती है तो नियमानुसार उसके खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।

हालांकि, आधिकारिक सूची या आदेश जारी होने तक किसी व्यक्ति को भ्रष्ट, दागी या दोषी बताना उचित नहीं होगा।

1802(ए) के प्रावधान से कार्रवाई का रास्ता

भारतीय रेलवे स्थापना संहिता (आईआरईसी) वॉल्यूम-2 के नियम 1802(ए) के तहत निर्धारित परिस्थितियों में जनहित में समय से पहले अनिवार्य सेवानिवृत्ति का प्रावधान है। सेवा समीक्षा के दौरान उपलब्ध आधिकारिक रिकॉर्ड और संबंधित कर्मचारी के सेवा इतिहास को आधार बनाया जाता है।

अब सूची पर टिकी निगाहें

सूत्रों से मिली जानकारी सही साबित होती है तो आने वाले समय में आरपीएफ के अधिकारी-कर्मचारियों की कार्यप्रणाली को लेकर महत्वपूर्ण तस्वीर सामने आ सकती है।

क्या वाकई तैयार हो रही है सूची? इसमें किन नामों की एंट्री है? और समीक्षा के बाद कितनों पर गिरेगी गाज?

इन सवालों के जवाब आधिकारिक निर्णय सामने आने के बाद ही स्पष्ट होंगे।

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