भारतीय बॉक्सिंग अब सिर्फ पदक जीतने नहीं, दुनिया पर दबदबा बनाने की राह पर” बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के महासचिव प्रमोद कुमार से खेल विश्लेषक बृजेंद्र यादव की खास बातचीत
रिपोर्ट नवीन यादव
झांसी। भारतीय मुक्केबाजी ने बीते वर्षों में अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी मजबूत पहचान बनाई है। कॉमनवेल्थ खेलों से लेकर विश्व चैंपियनशिप तक भारतीय मुक्केबाजों का प्रदर्शन लगातार बेहतर हुआ है। इसी बदलते परिदृश्य, चुनौतियों और भविष्य की रणनीति को लेकर बॉक्सिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया के महासचिव प्रमोद कुमार से खेल विश्लेषक बृजेंद्र यादव ने खास बातचीत की। पेश हैं बातचीत के प्रमुख अंश—
बृजेंद्र यादव : कॉमनवेल्थ खेलों में भारतीय मुक्केबाजों के प्रदर्शन को आप किस नजरिए से देखते हैं? क्या यह भारतीय बॉक्सिंग के नए दौर की शुरुआत है?
प्रमोद कुमार : निश्चित रूप से। भारतीय मुक्केबाजी ने साबित किया है कि हमारे पास प्रतिभाओं की कोई कमी नहीं है। कॉमनवेल्थ में खिलाड़ियों का प्रदर्शन उनकी मेहनत, वैज्ञानिक प्रशिक्षण और सही दिशा में किए जा रहे प्रयासों का परिणाम है। अब हमारा लक्ष्य केवल पदक जीतना नहीं, बल्कि विश्व चैंपियनशिप और ओलंपिक में लगातार शीर्ष स्तर पर बने रहना है।
बृजेंद्र यादव : कॉमनवेल्थ के पदकों को ओलंपिक सफलता में बदलना कितना बड़ी चुनौती है?
प्रमोद कुमार : यह सबसे बड़ी चुनौती है। कॉमनवेल्थ और ओलंपिक की प्रतिस्पर्धा में काफी अंतर है। इसलिए खिलाड़ियों को केवल किसी एक प्रतियोगिता के लिए तैयार करने के बजाय हम दीर्घकालिक योजना पर काम कर रहे हैं। अंतरराष्ट्रीय अनुभव, उच्च स्तरीय स्पैरिंग, फिटनेस, खेल विज्ञान और मानसिक मजबूती—इन सभी पहलुओं को साथ लेकर चलना होगा।
बृजेंद्र यादव : बड़े मंच पर दबाव के कारण कई बार प्रतिभाशाली खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन नहीं कर पाते। मानसिक तैयारी को लेकर क्या कदम उठाए जा रहे हैं?
प्रमोद कुमार : आधुनिक बॉक्सिंग में केवल ताकत और तकनीक से मुकाबला नहीं जीता जा सकता। मानसिक मजबूती भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। हम खिलाड़ियों के साथ खेल मनोवैज्ञानिकों और विशेषज्ञों की मदद ले रहे हैं। खिलाड़ी के भीतर यह विश्वास होना चाहिए कि वह दुनिया के किसी भी मुक्केबाज को हराने की क्षमता रखता है।
बृजेंद्र यादव : चयन प्रक्रिया को लेकर अक्सर सवाल उठते हैं। पारदर्शिता बढ़ाने के लिए क्या नई व्यवस्था की जा रही है?
प्रमोद कुमार : हमारी कोशिश हमेशा यही रहती है कि चयन योग्यता और प्रदर्शन के आधार पर हो। खिलाड़ी को भरोसा होना चाहिए कि रिंग में उसका प्रदर्शन ही उसकी सबसे बड़ी पहचान है। चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और प्रतिस्पर्धी बनाने के लिए लगातार सुधार किए जा रहे हैं।
बृजेंद्र यादव : छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में कई प्रतिभाएं संसाधनों के अभाव में पीछे रह जाती हैं। उन तक फेडरेशन कैसे पहुंचेगा?
प्रमोद कुमार : यह बेहद महत्वपूर्ण विषय है। हमारी प्राथमिकता महानगरों के साथ-साथ छोटे शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों से प्रतिभाओं की तलाश करना है। देश के छोटे-छोटे कस्बों में ऐसे मुक्केबाज मौजूद हैं, जिनमें अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की क्षमता है। जरूरत है उन्हें सही मंच, प्रशिक्षण और पर्याप्त प्रतियोगिताएं उपलब्ध कराने की।
बृजेंद्र यादव : क्या राज्यों की बॉक्सिंग व्यवस्था को मजबूत किए बिना भारत विश्व की नंबर एक बॉक्सिंग ताकत बन सकता है?
प्रमोद कुमार : नहीं। राष्ट्रीय टीम की सफलता की नींव राज्यों में तैयार होती है। इसलिए राज्य संघों, अकादमियों और प्रशिक्षकों को मजबूत करना बेहद जरूरी है। हमें जमीनी स्तर पर ऐसी व्यवस्था बनानी होगी, जहां प्रतिभा की पहचान कम उम्र में हो और उसका व्यवस्थित विकास किया जा सके।
बृजेंद्र यादव : क्या भारतीय कोच आधुनिक अंतरराष्ट्रीय बॉक्सिंग के साथ कदमताल कर पा रहे हैं?
प्रमोद कुमार : भारतीय कोचों में प्रतिभा और अनुभव दोनों हैं, लेकिन खेल लगातार बदल रहा है। इसलिए कोचों का भी समय-समय पर उन्नयन जरूरी है। अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों से प्रशिक्षण, आधुनिक तकनीक और खेल विज्ञान की जानकारी को भारतीय कोचिंग व्यवस्था में शामिल करना हमारी प्राथमिकता है।
बृजेंद्र यादव : क्या खिलाड़ियों पर पदक का दबाव कम करने की दिशा में भी फेडरेशन काम कर रहा है?
प्रमोद कुमार : खिलाड़ी के भीतर पदक जीतने की भूख होनी चाहिए, लेकिन अनावश्यक दबाव नहीं। हमारा काम ऐसी परिस्थितियां उपलब्ध कराना है, जिसमें खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन कर सके। हम चाहते हैं कि खिलाड़ी सिर्फ परिणाम के बजाय अपनी प्रक्रिया और प्रदर्शन पर ध्यान केंद्रित करे।
बृजेंद्र यादव : भारतीय महिला बॉक्सिंग ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग पहचान बनाई है। क्या महिलाओं का प्रदर्शन अब पुरुषों की तुलना में अधिक प्रभावशाली हो रहा है?
प्रमोद कुमार : भारतीय महिला बॉक्सिंग ने वास्तव में शानदार प्रगति की है। लेकिन मैं पुरुष और महिला बॉक्सिंग की तुलना नहीं करूंगा। दोनों वर्गों में हमारे पास बेहतरीन प्रतिभाएं हैं। हमारा लक्ष्य दोनों वर्गों को समान अवसर, प्रशिक्षण और सुविधाएं उपलब्ध कराना है।
बृजेंद्र यादव : भारतीय बॉक्सिंग का अगला बड़ा लक्ष्य क्या है?
प्रमोद कुमार : हमारा लक्ष्य स्पष्ट है—विश्व स्तर पर लगातार पदक जीतना और ओलंपिक में भारत को बॉक्सिंग की शीर्ष शक्तियों में शामिल करना। इसके लिए हमें आज से ही अगली पीढ़ी के मुक्केबाज तैयार करने होंगे।
बृजेंद्र यादव : अंत में भारतीय मुक्केबाजों और उनके प्रशंसकों के लिए आपका संदेश?
प्रमोद कुमार : मैं देश के सभी मुक्केबाजों से कहना चाहता हूं कि मेहनत का कोई विकल्प नहीं है। रिंग में उतरते समय अपने देश पर गर्व महसूस करें और हर मुकाबले को अपना सर्वश्रेष्ठ देने का अवसर मानें। भारतीय बॉक्सिंग का भविष्य बहुत उज्ज्वल है और हम सब मिलकर इसे नई ऊंचाइयों तक ले जाएंगे।










